सीएसएमटी से घाटकोपर, कल्याण, मानखुर्द और पनवेल, मुंबई में लोकल ट्रेन में रात को हुड़दंग मचाया तो खैर नहीं

मुंबई/एजेंसी। मध्य रेलवे पर इन दिनों रात की ट्रेनों में अपराध बढ़ रहा है। 28 अप्रैल को कुछ लड़कों ने छोटी-सी बात पर एक बुज़ुर्ग को चाकू घोंप दिया, तो कहीं चलती लोकल से धक्का देकर युवक को गिरा दिया गया। रेलवे का कहना है कि चुनावों के कारण आरपीएफ जवानों की दो कंपनियां इलेक्शन ड्यूटी पर हैं। एक कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। बहरहाल, अपराध पर काबू पाने के लिए मध्य रेलवे ने स्पेशल टीम बनाई है, जिसमें आरपीएफ के जवान अब दिन-रात, ट्रेन में या प्लैटफॉर्म पर, भीड़ में या स्टेशनों के सुनसान कोनों में पेट्रोलिंग कर रही है। आरपीएफ की इस स्पेशल टीम ने कुछ स्टेशनों पर मोबाइल चोरों को रंगे हाथों भी पकड़ा है।
आरपीएफ बनवा रही है बायोमैट्रिक रेकॉर्ड
एक अधिकारी ने बताया स्पेशल टीम पेट्रोलिंग के दौरान संदेह के आधार पर लोगों को फॉलो करती है। ऐसे में, कुछ केसेज में आरोपियों को यात्रियों के बैग या जेब से मोबाइल निकालते हुए लाइव पकड़ा गया है। कई स्टेशनों पर रात में नशेड़ियों को भी पकड़ा गया है। अधिकारी ने बताया कि इस तरह के लोगों का बायोमैट्रिक रेकॉर्ड चेक किया जाता है, तब वो मिलता ही नहीं। ये लोग बिना आधार कार्ड बनवाए घूम रहे होते हैं। इस तरह के लोगों का बायोमैट्रिक रेकॉर्ड रखने के लिए आरपीएफ ने इनके आधार कार्ड भी बनवाए हैं।
स्पेशल टीम की स्पेशल ड्राइव
मध्य रेलवे पुलिस बल के अधिकारियों ने पूरे मुंबई डिविजन की स्थिति को परखने के लिए 4 स्पेशल टीमें बनाई सीएसएमटी से घाटकोपर, घाटकोपर से कल्याण, सीएसएमटी से मानखुर्द और मानखुर्द से पनवेल। 4 लोगों की एक टीम को दो शिफ्ट में लगाया गया और इन्हें पीक आवर्स में फोकस करने को कहा गया। 26 अप्रैल से 2 मई तक स्पेशल टीम की ड्राइव में अलग-अलग मामलों में क़रीब 2 हज़ार केस बनाए हैं, जिससे रेलवे को 3.66 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
मुंबई में यात्रियों की संख्या के हिसाब से जवानों की संख्या कम है। रेलवे को यात्री सुरक्षा के लिए एमएसएफ और होमगार्ड जैसी एजेंसियों की सेवा लेनी पड़ती है। दूसरी ओर स्टेशनों या प्लैटफॉर्म पर लगे सीसीटीवी के एक्सेस भी आरपीएफ के पास होते हैं। नए कैमरे में एआई तकनीक है, जिससे अपराधियों के रिकॉर्ड से चेहरे भी पहचाने जा सकते हैं। तकनीक का इस्तेमाल कर स्पेशल टीम टारगेट एरिया में काम करती है। ऐसे में, गंभीर अपराध को तो कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रेलवे परिसरों में घूमने वाले बेटिकट लोग हों या दिव्यांग कोच में अतिक्रमण करने वाले लोगों पर भी नकेल कसी जा सकती है। ऐसे में, रेलवे के लिए आरपीएफ की स्पेशल टीमें कारगर साबित हो रही हैं।

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