जयपुर रेलवे स्टेशन की पहली महिला कुली मंजू देवी, जो स्टेशन की हैं शान
सात साल पहले राष्ट्रपति से मिला सम्मान

जयपुर/एजेंसी। राजधानी जयपुर के रेलवे स्टेशन पर रोज सैकड़ों कुली यात्रियों के सामान के साथ दौड़ते नजर आते हैं, लेकिन इन्हीं के बीच एक नाम ऐसा है जिसने अपनी मेहनत से अलग पहचान बनाई है। बैज नंबर 15 वाली मंजू देवी जयपुर स्टेशन की पहली महिला कुली हैं, जो बीते 15 वर्षों से इस जिम्मेदारी को निभा रही हैं।
मंजू देवी तीन बच्चों की मां हैं और परिवार की अकेली कमाने वाली सदस्य हैं। पति के निधन के बाद उनके सामने जीवनयापन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। पारिवारिक विवादों और मानसिक तनाव के दौर में मां मोहिनी ने उनका हौसला बढ़ाया। उसी सहारे मंजू देवी ने अपने दिवंगत पति महादेव का कुली लाइसेंस हासिल किया और जयपुर रेलवे स्टेशन पर काम शुरू किया।
बच्चों का भविष्य सबसे बड़ी ताकत
मंजू देवी मानती हैं कि यात्रियों का सामान उठाने से ज्यादा जिम्मेदारी बच्चों की पढ़ाई की है। आज उनकी बड़ी बेटी पटवारी की तैयारी कर रही है, छोटी बेटी पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटी है और बेटा कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। मंजू देवी की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मसम्मान की मिसाल बन चुकी है।
उत्तर-पश्चिम रेलवे के जयपुर स्टेशन पर मंजू देवी अन्य कुलियों की तरह ही ट्रेनों का इंतजार करती हैं। उनका कहना है कि यहां महिला और पुरुष के बीच कभी भेदभाव महसूस नहीं हुआ। यात्री भी उन्हें सम्मान के साथ देखते हैं और सामान उठवाने में किसी तरह का फर्क नहीं करते। दिनभर भागदौड़ और मेहनत के बावजूद वह पूरे समर्पण से काम करती हैं।
हर ट्रेन के रुकते ही मंजू देवी की नजर उतरते यात्रियों पर होती है। मन में यही उम्मीद रहती है कि कोई उन्हें बुलाए और अपना सामान स्टेशन के बाहर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपे। इसी मेहनत से वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और बच्चों का भविष्य संवार रही हैं।
मंजू देवी की मेहनत और संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चयनित 112 महिलाओं में वह भी शामिल रहीं। 20 जनवरी 2018 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके जीवन संघर्ष की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया।





