मुंबई नगर निगम के नायर अस्पताल के ब्लड बैंक को एनएबीएच मान्यता हुई प्राप्त
नायर राज्य का पहला एनएबीएच मान्यता प्राप्त सरकारी अस्पताल बना

कांती जाधव/मुंबई। अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ पाना हर किसी के लिए ज़रूरी है, खासकर जब किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा हो। भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई में कुछ बेहतरीन सरकारी अस्पताल हैं। इसमें नायर अस्पताल भी शामिल है, जिसे आधिकारिक तौर पर टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज और बीवाईएल नायर चैरिटेबल अस्पताल के नाम से जाना जाता है, मुंबई के चिकित्सा समुदाय की प्रगति और समर्पण का प्रतीक है। 1921 में असहयोग आंदोलन के उत्साह के दौरान स्थापित, यह महात्मा गांधी के आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के आह्वान का परिणाम था। अपनी दिवंगत माँ, बाई यमुनाबाई लक्ष्मण नायर के सम्मान में, डॉ. एएल नायर ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए इस संस्थान की स्थापना की।
महानगरपालिका के नायर अस्पताल के ब्लड बैंक को अब राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता मिल गई है। इससे मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। नायर अस्पताल एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला राज्य का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है। यह राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देश भर के लगभग 5,200 ब्लड बैंकों में से केवल 148 ब्लड बैंकों को ही एनएबीएच मान्यता प्राप्त है। इसमें सरकारी क्षेत्र के केवल 12 ब्लड बैंक शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से एम्स और पीजीआई मेडिकल कॉलेज जैसे अस्पताल शामिल हैं।
इस सम्बन्ध में नायर अस्पताल के डीन डॉ. शैलेश मोहिते ने कहा कि हमारे ब्लड बैंक को एनएबीएच मान्यता मिल गई है। यह बहुत गर्व की बात है। इसके लिए हमें मनपा आयुक्त भूषण गगरानी, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा, उपायुक्त शरद उगाडे और मेडिकल कॉलेज निदेशक डॉ. नीलम अंद्राडे का मार्गदर्शन मिला। हमारे ब्लड बैंक की प्रभारी अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. ललिता पाटिल, शिक्षकों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने भी इसके लिए कड़ी मेहनत की।





