पटरी के पहरेदारों का कौन सुनेगा दर्द, नार्थ सेन्ट्रल रेलवे प्रयागराज के प्रयागराज मंडल में ट्रेकमेनों की हो रही दुर्दशा

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। पटरियों की मरम्मत करने वाले ट्रैकमैन से रेलवे अधिकारी दफ्तर व बंगलों में काम करवा रहे हैं। गर्मी, बरसात, सर्दी, कोई भी मौसम हो, गैंगमैनों की पैनी निगाहें पटरियों की मरम्मत के साथ-साथ लगातार इसकी देखरेख करती हैं ताकि ट्रेनें सुरक्षित रफ्तार भर सकें। इसके लिए उन्हें जोखिम भत्ता भी मिलता है।रेलवे स्टेशनों के बीच गैंगमैनों की सक्रियता से कई हादसे टले गया हैं। यह सक्रियता बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि ट्रैकमैन मेंटेनेंस के काम में लगे रहें, लेकिन रेलवे अधिकारी उनसे घर व दफ्तरों का काम ले रहे हैं। इससे ट्रैक की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। सूत्रों के मुताबिक जो गैंगमैन अफसरों की ड्यूटी बजा रहे हैं, उनमें 50 प्रतिशत से अधिक गैंगमैन इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों की सेवा में लगे हैं।
ऐसे ही एक मामले में पहले प्रयागराज मंडल में एसएसई/पीआरवाईजे/प्रयागराज में ट्रैकमैनों से ट्रेक कार्य के साथ-साथ अधिकारियों, सुप्रवाईजरो के कोठियों पर तो धमकी देकर कार्य कराया जाता था। लेकिन अब तो लोक निर्माण विभाग के सड़कों की भी सफाई करायी जा रही है। जिसका जीवंत उदाहरण दिनांक 16/09/20323 कोएनसीआर/मुख्यालय/पीआरवाईजे के समीप 42 नंबर पुलिया पर ट्रेकमेन लोक निर्माण विभाग के रोड पर झाड़ू व धुलाई करते पाये गये । यह कार्य निश्चित रूप से रेलवे के ट्रेकमेन कर्मचारीयों के सम्मान व पद की गरिमा को तार -तार करने जैसा है जो कि घोर निंदनीय है । रेलवे प्रशासन को ट्रेकमेनों को इस तरह के कार्यो पर लगाने वाले अधिकारियों पर कठोरतम कार्यवाही करनी चाहिए। पहले भी ट्रैक मेंटेनरों से घरों पर ड्यूटी करवाने वाले अफसरों की शिकायतों को रेलवे प्रशासन को भेजा गया था। इस पर अधिकारियों को फटकार भी लगी है।
हालांकि इसके बावजूद गैंगमैनों को ट्रैक पर भेजे जाने की प्रक्रिया काफी सुस्त है। रेलवे प्रशासन की ओर से भी ट्रैकमैन की स्थितियों को नजरअंदाज किया जाता है। सुरक्षा को लेकर अब भी कई मुद्दों पर काम करना बाकी है। रेलवे में तकनीक लगातार बदल रही है लेकिन पिछले दस वर्षों में ट्रैकमैन को उसके अनुरूप को रिफ्रेशर कोर्स नहीं कराया गया है। ट्रैकमैन को अच्छी गुणवत्ता वाले जूते और वर्दी मिलनी चाहिए। ताउम्र बिना दुर्घटना वाली सर्विस देने वाले रेलकर्मी को रिटायरमेंट के दौरान रेलवे बोर्ड की ओर से जो अवॉर्ड दिया जाता है, वो सम्मान ट्रैकमैन को भी मिलना चाहिए। पटरियों पर काम करने वाले इन ‘सिपाहियों’ की व्यथा कोई भी सुनने को तैयार नहीं है।

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