राजस्थान में अब आरएसी के जवानों की जेल में एंट्री बंद, डीजी ने सुरक्षा व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव
जेल प्रहरियों और आरएसी के जवानों की कड़ी तोड़ने की कोशिश

- जेलों में आरएसी जवानों की एंट्री पर लगा प्रतिबंध।
- सीएम और डिप्टी सीएम को मिली थी धमकियां।
- सुरक्षा में बदलाव, जेल प्रहरियों के साथ आरएसी जवानों की कड़ी तोड़ी।
जयपुर/एजेंसी। प्रदेश की विभिन्न जेलों में सुरक्षा के लिए अब तक आरएसी की बटालियन के जवान तैनात होते थे। अब जेलों में आरएसी के जवानों की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला जेल डीजी गोविंद गुप्ता ने लिया है। जेलों की सुरक्षा व्यवस्था में जेल डीजी ने व्यापक बदलाव कर दिए हैं। इन बदलावों के तहत अब आरएसी के जवानों को जेल के अंदर एंट्री नहीं दी जाएगी बल्कि जेल के मुख्य गेट के बाहर ही तैनात किया जाएगा। पिछले दिनों प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद कैदियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने और मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को धमकी दिए जाने के बाद ये फैसला लिया गया।
जेल में बंद कैदियों के पास प्रतिबंधित सामान पहुंचाने में कई बार जेल प्रहरियों और आरएसी के जवानों की मिलीभगत सामने आई है। इसी मिलीभगत को देखते हुए जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया है। अब तक जेल प्रहरियों के स्थान पर आरएसी के जवानों की जेल के अंदर ड्यूटी लगा दी जाती थी। ऐसे में आरएसी के कुछ जवानों की कैदियों और उनके परिजनों से मिलीभगत सामने आई थी। इसी मिलीभगत के चलते अब केवल जेल प्रहरियों को ही जेल के अंदर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया जाएगा। आरएसी के जवानों की ड्यूटी केवल जेल के मुख्य गेट के बाहर ही लगाई जाएगी। जेल डीजी ने लिखित में आदेश जारी कर दिया है और जेल में बैरिकेड तक तैनात आरएसी के जवानों को तुरंत हटाने के निर्देश दे दिए हैं।
अब तक जेल के अंदर और बाहर दोनों जगह आरएसी के जवान और जेल प्रहरी नियुक्त रहते थे। ऐसे में कैदी जेल प्रहरियों से सांठगांठ करते थे और फिर जेल प्रहरी आरएसी के जवानों से सांठगांठ कर लेते थे। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए मिलीभगत होती और फिर परिजनों या अन्य किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया प्रतिबंधित सामान कैदी तक पहुंच जाया करता था। अब जेल प्रहरी और आरएसी के जवानों की कड़ी को तोड़ा जा रहा है। दोनों की ड्यूटी बिल्कुल अलग अलग कर दी गई है ताकि दोनों का आपसी मेल ही ना हो। कैदियों तक पहुंचाए जाने वाले सामान की जांच जेल के अंदर जेल प्रहरी करेंगे और जेल के मुख्य गेट पर आरएसी के जवान जांच करेंगे। दोनों का कार्य दूर-दूर कर दिया गया है ताकि आपसी मिलीभगत ना हो सके।
सीएम और डिप्टी सीएम को मिल चुकी जान से मारने की धमकियां
जेल में बंद कैदी बेखौफ होकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाए गए। पिछले डेढ़ महीने में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चार बार जान से मारने की धमकियां जेल में बंद कैदियों द्वारा दी जा चुकी है। एक बार डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा को भी जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। हालांकि पुलिस ने धमकी देने वाले कैदियों का पता लगा लिया और उनकी गिरफ्तारी भी कर ली लेकिन जेल बंद कैदियों द्वारा मोबाइल इस्तेमाल करने की घटना मामूली नहीं है। जेल प्रशासन ने अब इसे गंभीरता से मिला है। इस तरह की घटनाओं के बाद जेल प्रशासन ने तीन प्रहरियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। साथ ही 11 अधिकारियों कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है।




