यूपी के बांदा में रेपिस्ट को 58 दिन में हुई फांसी की सजा

रेप के बाद आइस बॉक्स में बंद करके 3 साल की बच्ची को जंगल में फेंका था

बांदा/उत्तर प्रदेश। यूपी के बांदा जनपद में एक 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के आरोपी सुनील निषाद को फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने महज़ 58 दिन की सुनवाई के बाद फांसी की सज़ा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले से बच्ची के परिवार और पूरे इलाके में न्याय की उम्मीद जगी है। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे जघन्य अपराध करने वाले को कोई रियायत नहीं दी जा सकती। फैसला सुनाने के बाद उन्होंने अपनी कलम की निब तोड़ दी, जो ऐसे मामलों में न्याय की कठोरता को दर्शाता है।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाह पेश किए, जिन्होंने आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत दिए। कोर्ट में मौजूद बच्ची के परिवारवालों और ग्रामीणों ने इस फैसले पर संतोष जताया। वहीं, दोषी सुनील निषाद ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उसे फंसाया गया है।
यह दिल दहला देने वाली घटना 3 जून की है, जब सुनील टॉफी का लालच देकर बच्ची को अपने घर ले गया था। दरिंदगी के बाद उसने बच्ची को एक आइस बॉक्स में बंद कर 6 किलोमीटर दूर जंगल में फेंक दिया था। इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई थी।
आरोपी पुलिस की गिरफ्त में तब आया, जब बच्ची की तलाश कर रहे परिवार ने उसके कपड़ों पर खून के निशान देखे। ग्रामीणों की मदद से उसे पकड़ा गया और कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना गुनाह कबूल किया था। हालांकि, फैसले के बाद उसने अपने आप को निर्दोष बताया है।
अभियोजन पक्ष के कमल सिंह का कहना है कि न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने फैसले में लिखा है कि अभियुक्त को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए। उनके इस ऐतिहासिक फैसले से निश्चित ही भविष्य में अपराध करने वाले भयभीत होंगे। इस जघन्य में मामले में अभियुक्त को सजा दिलाने के लिए पुलिस की अहम भूमिका रही। पुलिस की ओर से 15 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल की गई। साथ ही तीन दिन पहले अभियुक्त के घर पर बुलडोजर चला कर उसे ध्वस्त किया गया था।

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