वाराणसी में बनेगा तिब्बती चिकित्सा पद्धति वाला हॉस्पिटल

वाराणसी,(उत्तर प्रदेश)। तिब्बत को लेकर चीन का दावा जगजाहिर है, लेकिन तिब्बत-भारत की सांस्कृतिक विरासत में समानता और संबंध कितने प्रगाढ़ हैं, ये कोई छिपी हुई बात नहीं है। भारत ने हमेशा तिब्बत की स्वायत्तता का समर्थन किया है। इस संबंध को और मजबूती देने के लिए अब केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार ने चिकित्सा के क्षेत्र में भी मजबूत कदम बढ़ाया है। भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली काशी के सारनाथ में 93 करोड़ की लागत से विशुद्ध तिब्बती चिकित्सा प्रणाली से संचालित अस्पताल ‘सोवा रिग्पा’ की सौगात देने की तैयारी पूरी कर ली है।
भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली से मिलेगी तिब्बत-भारत के रिश्तों को नई पहचान
भारतीय चिकित्सा पद्धति की तरह ही बेहद पुरानी और प्रमाणिक चिकित्सा पद्धति ‘सोवा रिग्पा’ के बारे में केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलसचिव हिमांशु पांडेय ने बताया कि सोवा रिग्पा मूलतः तिब्बत में ही विकसित हुआ है। ये दुनिया की पुरानी और प्रमाणिक चिकित्सा पद्धति है। सातवीं से आठवीं शताब्दी के समय में तिब्बत के राजाओं की ओर से इस पद्धति को विस्तार देने के लिए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस कराई गई थी, जिसमे पर्सिया, चाइना, तिब्बत समेत कई देशों के चिकित्सा विद्वान शामिल हुए थे। तिब्बती चिकित्सा पद्धति चीन के कई प्रांतों में, मंगोलिया, रूस, नेपाल, भारत समेत कई देशों तक ये चिकित्सा पद्धति फैली हुई है।

सोवा रिग्पा कि पारंपरिक थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों ही समृद्ध है, जो क्लीनिकल पद्धति पर आधारित है। इसकी करीब आठ हजार से दस हजार कृतियां प्रकाशित हुई हैं। साथ ही तीन से चार हजार ग्रंथ हैं। भारत सरकार और यूपी सरकार के संयुक्त प्रयासों की वजह से 93 करोड़ की लागत से इस अस्पताल के निर्माण का रास्ता भगवान बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ में हो पाना संभव हो पाया है। सौ बेड के इस अस्पताल में 6 कंसल्टेंट रूम, (ज्योतिष कंसल्टेंट भी), एक बड़ा वेटिंग हॉल, अत्याधुनिक इमरजेंसी, इंटेंसिव केयर यूनिट, ऑपरेशन थिएटर, इनडोर पेशेंट, थेरपीज, फार्मेसी, क्लास रूम, लाइब्रेरी, म्यूजियम, लैब, हरबेरियम और नक्षत्र शाला होगा। इसके अलावा कई सहायक विभाग और कई जरूरी सुविधाएं भी होंगी।

केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार मिलकर लगातार भगवान बुद्ध में आस्था रखने वाले देशों से संबंध मजबूत कर रही है। भगवान बुद्ध को मानने वाले देश के नागरिकों को मोदी सरकार ने हमेशा अपनी ओर से संदेश देने का काम किया है। सोवा रिग्पा अस्पताल वैचारिक के स्तर पर ही नहीं, बल्कि चिकित्सा प्रणालियों में समानता की वजह से सारनाथ का चयन का आधार बना है। इससे पूर्व में भी मोदी और योगी की सरकार ने मिलकर जापान के सहयोग से रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया, जोकि भारत और जापान के दोस्ती की एक मिसाल के तौर पर स्थापित हो चुकी है। अब इसी तर्ज पर भारत और तिब्बत के संबंधों का एक प्रतीक यह सोवा रिग्पा अस्पताल बनेगा।

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