वीरेंद्र सचदेवा ने संभाला दिल्ली भाजपा अध्यक्ष का पद, कहा- भरोसे पर खरा उतरने का करूंगा प्रयास

नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा अब दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष होंगे। भाजपा सांसदों व विधायकों की उपस्थिति में सचदेवा ने अधिकारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस पद पर सचदेवा की नियुक्ति की है। पदभार ग्रहण करने के बाद सचदेवा ने शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के साधारण कार्यकर्ता को जिस भरोसे के साथ बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, उसको पूरा करने का प्रयास करुंगा। शरणार्थियों को अगर किसी पार्टी ने सही तौर पर सम्मान देने का काम किया है तो वह भाजपा है। आज भी भाजपा का एक कार्यकर्ता हूं और आगे भी इसी भाव के साथ ही हम सब मिलकर काम करेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं आप के सभी भ्रष्टाचारी नेता एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। केजरीवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन किया है।
सचदेवा ने कहा कि फर्जी पोस्टर लगाने के मामले में आप की पोल खुल गई है। में राजनीतिक विरोध का अधिकार सबको है पर विरोध करते हुए अपना नाम भी अंकित करना कानूनी रूप से आवश्यक है। मुख्यमंत्री कोई भी सांविधानिक नियम नहीं मानते हैं और इसलिए फर्जी पोस्टर मामले में प्रिंट लाइन लिखने के कानूनी नियम तोड़ने के बाद गलती स्वीकारने की बजाए पोस्टरों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से कर रहे हैं जो निंदनीय है। शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली को लेकर अपनी रणनीति बदली है। राजधानी में पूर्वांचलियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भाजपा लगातार अध्यक्ष पद पूर्वांचलियों को सौंप रही थी। पहले सतीश उपाध्याय को कमान सौंपी गई, इसके बाद मनोज तिवारी व फिर आदेश गुप्ता को, अब इस नीति को बदलते हुए भाजपा ने पंजाबी शरणार्थी वीरेंद्र सचदेवा को कमान सौंपी है।
तीन-तीन पूर्वांचली नेताओं के नेतृत्व में भाजपा लगातार विधानसभा चुनाव हारती रही है। पूर्वांचली वोट का जनाधार भी एकतरफा आते हुए नहीं दिखा। हालांकि, मनोज तिवारी को जब कमान सौंपी गई थी तो पूर्वांचली लामबंद हुए थे और एमसीडी चुनाव में भाजपा ने जरूर सत्ता को बचाए रखने में कामयाबी हासिल की, लेकिन दबी जुबान में पंजाबी नेताओं में इस बात की नाराजगी भी थी। राजनीति के जानकारों की माने तो दिल्ली में बड़ा तबका प्रवासियों को हो गया है। आधे से अधिक विधानसभा में उनका दबदबा भी है। ऐसे में भाजपा ने अपनी रणनीति बदलते हुए प्रदेश की कमान पूर्वांचलियों को ही सौंप रही थी। जबकि एक दशक पहले दिल्ली पर पंजाबी व वैश्यों का दबदबा था। राजनीति भी इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती थी। चाहे वह लालकृष्ण आडवाणी हो, प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा हो या मदन लाल खुराना। इसी तरह डॉ. हर्षवर्धन, विजय गोयल, विजेंद्र गुप्ता समेत कई वैश्य समुदाय के नेताओं को कमान सौंपी गई।




