कानपुर में जगन्नाथ यात्रा से पहले पुलिस ने की महंतों से अभद्रता, थाना प्रभारी निलंबित
Before Jagannath Yatra in Kanpur, police behaved indecently with the Mahants, station in-charge suspended

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर जनरलगंज भाईजी मंदिर से निकलने वाली शोभा यात्रा का इतिहास 200 साल पुराना है। आरोप है कि बादशाही नाका थाने की पुलिस ने महंत के साथ बदसलूकी और अभद्रता की। इसके विरोध में सपा और भाजपा के जनप्रतिनिधि उतर आए। श्री जगन्नाथ रथ यात्रा प्रबंधन कमेटी और पुलिस के बीच जमकर शक्ति प्रदर्शन हुआ। महंत और पक्ष-विपक्ष के नेता थाना प्रभारी के निलंबन की जिद पर अड़ गए और धरने पर बैठ गए।
श्री जगन्नाथ रथ यात्रा में विवाद की जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंची। इसके बाद थाना प्रभारी को निलंबित किया गया। रथ यात्रा 9 घंटे 40 मिनट देरी से निकाली जा सकी। रथ यात्रा कमेटी के पदाधिकारी और क्षेत्रीय लोग इस बात पर अड़े रहे कि जब तक थाना प्रभारी को निलंबित नहीं किया जा सकता है। तब तक यात्रा नहीं निकलेगी। इस दौरान जनप्रतिनिधियों की भी पुलिस से नोंकझोंक हुई। पुलिस का कहना था कि वह नियम का पालन करा रही है। ऐसे में किसी को निलंबित कैसे किया जा सकता है।
इस प्रदर्शन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक और पदाधिकारी भी शामिल थे। इस स्थिति में मामला और भी गंभीर हो गया। पुलिस यात्रा को सुचारू तरीके से निकलने और संतों को मनाने की हरसंभव कोशिश करती रही। हालांकि अधिकारी किसी भी सूरत में थाना प्रभारी को निलंबित करने के पक्ष में नहीं थे। बीजेपी उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने मुख्यमंत्री के ओएसडी के व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा। उन्होंने पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने बताया कि लगभग 45 मिनट बाद सीपी का फोन आया कि थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। आप लोग यात्रा निकालिए, जो यात्रा शाम पांच बजे निकाली जानी थी, वह यात्रा रात पौने दस बजे निकाली गई। जिलाध्यक्ष के मैसेज के बाद सीएम कार्यालय ने डीजीपी कार्यालय से जानकारी ली। इसके बाद तत्काल एक्शन लेने के निर्देश गए। यात्रा शुरू होने के बाद सांसद, विधायक समेत बड़ी संख्या में शहरवासियों ने हिस्सा लिया।




