भीमाशंकर मंदिर बंद होने के बाद भी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने किए ‘वीआईपी दर्शन”, मचा हंगामा, जांच के दिए गए आदेश

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह घटना श्री क्षेत्र भीमाशंकर स्थित ज्योतिर्लिंग मंदिर की है। यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे को विशेष प्रवेश और वीआईपी सुविधाएं दी गईं, जबकि मंदिर आम जनता के लिए बंद था। उद्योग मंत्री डॉ उदय सामंत ने विधान परिषद में घोषणा की कि इस पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल पिछले कुछ महीनों से भीमाशंकर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है। भीड़ को नियंत्रित करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए महाशिवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों के दौरान भी मंदिर आम जनता के लिए नहीं खोला गया था। पुणे के जिला कलेक्टर ने स्थानीय विधायकों की मौजूदगी में केवल ‘प्रशासनिक पूजा’ (अधिकारियों की ओर से की जाने वाली रस्मी पूजा) की थी। हालांकि, तब हंगामा मच गया जब यह बात सामने आई कि सांसद दुबे ने इन कड़ी पाबंदियों के दौरान मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस मकसद के लिए उन्हें हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति दी गई, एक मोटरकेड (वाहनों का काफिला) उपलब्ध कराया गया और विशेष वीआईपी दर्जा दिया गया।
इस मुद्दे को विधान परिषद में शिवसेना (ठाकरे गुट) के विधायक सचिन अहीर ने ‘सूचना के बिंदु’ के माध्यम से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि एक ऐसे सांसद को जिन्होंने पहले महाराष्ट्र के बारे में विवादित बयान दिए हैं। उनको इतना वीआईपी दर्जा क्यों दिया गया, जबकि मंदिर बंद था? हेलीकॉपर उतारने की अनुमति किसने दी? और प्रशासनिक तंत्र ने खुद को उनकी सेवा में क्यों लगा दिया?
इसके जवाब में मंत्री सामंत ने कहा कि हम जांच करेंगे कि मंदिर बंद होने के दौरान उन्हें दर्शन (पूजा) की अनुमति किसने दी। साथ ही हेलीकॉप्टर उतारने और दी गई अन्य सुविधाओं के विवरण की भी जांच करेंगे। सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित पक्षों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। इस घटना ने पुणे जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन को भी संदेह के घेरे में डाल दिया है। उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट जमा होने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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