गुरुग्राम की कोठी में चल रहा था अवैध धंधा, दो महिला समेत 13 आरोप दबोचे गए, कनाडा से सामने आया लिंक

Illegal business was going on in a house in Gurugram, 13 accused including two women were arrested, link to Canada emerged

गुरुग्राम। तकनीकी सहायता के नाम पर कनाडा मूल के लोगों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया गया है। साइबर थाना दक्षिण पुलिस ने तकनीकी सहायता के माध्यम से शुक्रवार रात सुशांत लोक फेस तीन के बी-ब्लॉक स्थित एक कोठी की चौथी मंजिल पर चल रहे कॉल सेंटर पर कार्रवाई की। यहां से टीम लीडर, दो युवतियों सहित कुल 13 आरोपित पकड़े गए। ये लोग माइक्रोसॉफ्ट का कर्मचारी बनकर विदेशियों से बात करते थे। उनका बैंक डाटा सुरक्षित करने के नाम पर उनसे 300-500 डालर के गिफ्ट कार्ड लेकर ठगी करते थे।
एसीपी साइबर क्राइम प्रियांशु दीवान ने बताया कि साइबर थाना दक्षिण पुलिस को शुक्रवार रात तकनीकी माध्यमों से सुशांत लोक फेस तीन के बी-ब्लॉक स्थित एक काेठी में फर्जी कॉल सेंटर चलने की जानकारी मिली। इस पर साइबर पुलिस टीम ने यहां छापेमारी की। देर रात कोठी की चौथी मंजिल का दरवाजा जब खुलवाया गया तो अंदर कुछ लोग फर्जी कॉल सेंटर संचालित करते पाए गए। पूछताछ के बाद कॉल सेंटर के टीम लीडर व दो युवतियों सहित कुल 13 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपितों की पहचान दिल्ली के राजा बिहार निवासी सूरज, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी विशाल दुबे, मैनपुरी निवासी शुभम दुबे, एटा निवासी हर्षित, गाजियाबाद निवासी अक्षत कुंडू, गाजियाबाद के वसुंधरा निवासी देवांश, लखनऊ के एलडीए कॉलोनी निवासी निशि शुक्ला, दिति शुक्ला, भिवानी निवासी रवि कौशिक, सौरभ तंवर, प्रिंस, फरीदाबाद के सेक्टर 18 निवासी अंकित चौहान, सोनीपत के गोहाना निवासी अक्षय के रूप में की गई। पुलिस टीम ने आरोपितों के विरुद्ध धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया।
आरोपितों से पुलिस पूछताछ में पता चला कि सूरज इस कॉल सेंटर का टीम लीडर है। यह किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर कर्मचारियों के साथ मिलकर कॉल सेंटर को चला रहा था। पकड़े गए सभी कर्मचारियों को नौकरी पर रखा गया था। इन्हें प्रति माह 30 हजार रुपये सैलरी मिल रही थी। सूरज को भी 30 हजार रुपये मिलते थे। इसे सिर्फ सेंटर की देखरेख करनी थी। अभी कॉल सेंटर का मालिक फरार चल रहा है। इसकी तलाश में छापेमारी जारी है।
कॉल सेंटर के टीम लीडर सूरज से पुलिस पूछताछ में पता चला कि यह पिछले एक महीने से अपने साथी आरोपितों के साथ मिलकर कॉल सेंटर चला रहा था। ये लोग कनाडा मूल के नागरिकों को माइक्राेसाफ्ट सपोर्ट की कस्टमर केयर सर्विस प्रदान करने के नाम पर ठगी करते थे। कर्मचारी पहले कनाडा के नागरिकों के कंप्यूटर में पाप-अप के माध्यम से वायरस भेजते थे। पॉप-अप में इनका टोल फ्री नंबर लिखा होता था। जब लोग इनके टोल फ्री नंबर पर कॉल करते थे, तो कॉल उनके स्टाफ के लैपटॉप में इंस्टॉल किए हुए एप्लीकेशन पर लैंड होती थी। कर्मचारी स्वयं को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का प्रतिनिधि बताकर विदेशी नागरिकों को झूठ बोलते थे कि उनकी बैंकिंग जानकारी, फोन कॉल व फोटो आदि लीक हो रही है और हैकरों के पास जा रही है।
समस्या दूर करने के नाम पर उनके कंप्यूटर में स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करवाकर उसका रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते थे। अकाउंट चेक करने के बहाने उनके अकाउंट पर 300 से 500 डॉलर तक का चार्ज लगा होना बताते थे और चार्ज हटाने के नाम पर उतनी ही राशि के गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए बोलते थे। फिर ये गिफ्ट कार्ड का नंबर पूछ लेते थे और कहते थे कि गिफ्ट कार्ड में खर्च किए डालर उनके बैंक अकाउंट में रिफंड हो जाएंगे। गिफ्ट कार्ड नंबर आने पर आरोपित दूसरे देश में बैठे अन्य साथियों से उसे रिडीम कराकर रुपये ट्रांसफर करा लेते थे। इस तरह से आरोपितों ने एक महीने में पांच सौ से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाया।
एसीपी साइबर क्राइम प्रियांशु दीवान ने बताया कि शनिवार को सभी आरोपितों से पूछताछ के बाद इन्हें कोर्ट में पेश किया गया। यहां से इन्हें जेल भेज दिया गया। जल्द ही कॉल सेंटर के मालिक को भी गिरफ्तार किया जाएगा। आरोपितों के कब्जे से जालसाजी में इस्तेमाल किए जाने वाले 12 लैपटॉप व तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर से इनका डाटा निकलवाया जाएगा। इसके माध्यम से ठगी के बारे में सटीक जानकारी सामने आ पाएगा।

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