जज और वकील मिलकर खा गए मुआवजे के पैसे! रेलवे क्लेम के नाम पर करोड़ों का घोटाला

रेलवे क्लेम घोटाले में ईडी का एक्शन

पटना/एजेंसी। रेलवे क्लेम घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 8.02 करोड़ रुपये की 24 अचल संपत्तियां कुर्क कर ली है। ये संपत्तियां पटना, नालंदा, गया और नई दिल्ली में हैं। ईडी ने पटना के विशेष न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें अधिवक्ता विद्यानंद सिंह और अन्य को दोषी ठहराने की मांग की गई है। इन पर रेलवे दावा न्यायाधिकरण में धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोप है कि इन्होंने दावेदारों को पूरा पैसा नहीं दिया और खुद हड़प लिया। सीबीआई ने इस मामले में पहले मामला दर्ज किया था। ईडी ने अब इस मामले में आगे कार्रवाई की है।
रेलवे क्लेम घोटाले में ईडी लगातार जांच कर रही है। इस जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई है। ईडी के अनुसार, अधिवक्ता विद्यानंद सिंह और उनकी टीम ने 900 से ज्यादा दावों का निपटारा किया। इन दावों में जज आरके मित्तल ने आदेश जारी किए थे। आरोप है कि आरोपियों ने दावेदारों को बिना बताए उनके बैंक खाते खुलवाए। फिर उन खातों से पैसे निकाले गए।
जांच में पता चला है कि रेलवे से मिली दावा राशि में से एक बड़ा हिस्सा वकीलों ने अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया। इसके लिए उन्होंने दावेदारों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया। ईडी के अनुसार, वकीलों ने दावेदारों के खातों से 10.27 करोड़ रुपये अपने खातों में ट्रांसफर किए। यह पैसा उनकी अवैध कमाई थी।
वकीलों ने इस अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई तरीके अपनाए। उन्होंने इस पैसे से अपने और अपनी पत्नियों के नाम पर संपत्तियां खरीदी। उन्होंने एक कंपनी के नाम पर भी संपत्ति खरीदी। इस तरह उन्होंने अपराध से कमाए पैसे को वैध बनाने की कोशिश की। ईडी ने इस मामले में वकीलों और जज आरके मित्तल से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।
ईडी ने इस मामले में एडवोकेट विद्यानंद सिंह, एडवोकेट परमानंद सिन्हा और विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। वे सभी अभी जेल में हैं। ईडी अभी भी इस मामले की जांच कर रही है। ईडी ने पटना के विशेष न्यायालय में पीएमएलए के तहत शिकायत दर्ज कराई है। पीएमएलए का मतलब है ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’। इसके तहत ईडी ने विद्यानंद सिंह, परमानंद सिन्हा, कुमारी रिंकी सिन्हा, अर्चना सिन्हा, विजय कुमार, निर्मला कुमारी और मेसर्स हरिजग बिजनेस एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड को दोषी ठहराने की मांग की है।
ये मामला रेलवे दावा न्यायाधिकरण (पटना) से जुड़ा है। इस मामले में, जब किसी की मृत्यु हो जाती थी, तो उसके परिवार को रेलवे से मुआवजा मिलता था। आरोप है कि वकीलों ने मुआवजे की राशि में गड़बड़ी की। उन्होंने दावेदारों को पूरा पैसा नहीं दिया और खुद ज्यादा पैसा हड़प लिया। सीबीआई की एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) इकाई ने इस मामले में पहले एफआईआर दर्ज की थी।
ईडी की जांच में पता चला है कि वकीलों की टीम ने 900 से ज्यादा दावों का निपटारा किया। इन दावों में जज आरके मित्तल ने आदेश दिए थे। आरोप है कि वकीलों ने दावेदारों की जानकारी के बिना उनके बैंक खाते खोले। उन्होंने रेलवे से मिली दावा राशि को अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया। इसके लिए उन्होंने दावेदारों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया।

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