बरेली में पताका यात्रा के साथ शुरू हुई ऐतिहासिक रामलीला, यूनेस्को ने घोषित की है विश्व धरोहर
The historic Ramlila started with the Pataka Yatra in Bareilly, UNESCO has declared it a World Heritage site

बरेली/उत्तर प्रदेश। हाथों में भगवा ध्वज, मुख पर जय श्रीराम के जयकारे, छतों से होती पुष्प वर्षा, भजनों पर झूमते लोग यह नजारा शनिवार को बरेली के ब्रह्मपुरी का था। होली पर ब्रह्मपुरी में होने वाली 165 वीं फाल्गुनी रामलीला की शुरुआत पताका यात्रा के साथ हो गई। नृसिंह मंदिर में भगवान श्रीगणेश, हनुमान जी का विधि-विधान के साथ पूजन किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता के स्वरूप के सजे बच्चों की आरती उतारी गई, जिसके बाद पताका यात्रा की शुरुआत हुई।
बैंड बाजे के साथ निकली पताका यात्रा में भक्तों ने अपने हाथ के भगवा ध्वज धारण किए हुए थे। जय श्रीराम, जय हनुमान, हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। घरों से लोगों ने यात्रा पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। पताका यात्रा नृसिंह मंदिर से शुरु होकर कर मलूकपुर चौराहा, सौदागरान, आलाहजरत, सीताराम कूंचा, बड़ा बाजार, दामोदर रास गली, बमनपुरी, मलूकपुर चौराहा होते हुए हनुमान मंदिर पर पहुंची।
कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि यहां पताका को मंदिर के प्रांगण में लगे पीपल के वृक्ष पर बांधकर विधिवत रामलीला की शुरुआत करने की अनुमति भगवान से ली जाती है। यह परंपरा रामलीला के साथ ही शुरु हुई थी। यात्रा में नगर निगम के उप सभापति सर्वेश रस्तोगी, हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर सिद्धराज सिंह, नवीन शर्मा, अखिलेश अग्रवाल, पंकज मिश्रा, विवेक शर्मा, महेश पंडित, सुरेश, सत्येंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।
ब्रह्मपुरी के रहने वाले बुजुर्ग सतीश बताते हैं कि अंग्रेजी शासन काल के दौरान शहर के ब्रह्मपुरी इलाके में सन 1861 में इस रामलीला की शुरुआत हुई थी। मान्यता है कि इस रामलीला की शुरुआत बच्चों ने की थी। बताते हैं कि होली के दौरान पहले लंबे समय छुट्टी के समय होती थी जिसमें बच्चे आपस में ही खेल-खेल में इसे मंचन करते थे। इसी के बाद वहां रहने वाले लोगों ने होली के आठ दिन पहले इसे कराने की परंपरा डाल दी, तब से ही होली से रामलीला की शुरुआत हो गई, और यह निरंतर चलती चली आ रही है। रामलीला के दौरान होली पर निकलने वाली राम बरात सबसे खास होती है, जो पूरे शहर भर में घूमती हैं।
श्रीराम लीला सभा कमेटी से वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा बताते है कि पहले रामलीला का मंचन ब्रह्मपुरी व शहर में रहने वाले लोग ही करते थे। लेकिन समय के साथ काम की अधिकता के चलते लोग इससे दूर होते गए। एक दौर ऐसा आया कि स्थानीय कलाकारों को अभाव होता गया। जिसके बाद कमेटी के सदस्यों ने रामलीला के मंचन के लिए दूसरे शहरों से टोलियां आने लगी। इस बार अयोध्या से रामायण के मंचन के लिए टोली को बुलाया गया है जो अपना किरदार निभाएंगे। यह टोली शनिवार को श्रीगणेश पूजन के साथ अपनी प्रस्तुति देंगी।
यूनेस्को ने 2015 में शहर के ब्रह्मपुरी में होने वाली रामलीला को विश्व धरोहर घोषित किया। 1861 से लगातार चली आ रही इस रामलीला की खासियत ये है कि इसका मंचन बरेली के अलग अलग मोहल्लों में होता है, अगस्त्य मुनि से संबंधित लीला का मंचन छोटी बमनपुरी स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में, राम-केवट संवाद साहूकारा में, मेघनाद यज्ञ बमनपुरी में और लंका दहन मलूकपुर चौराहा पर होता है। रविवार से रामलीला के मंचन की शुरुआत हो जाएगी।




