कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में वकीलों ने दिनदहाड़े एसएचओ को घसीटकर पीटा,वर्दी भी फाड़ी गई, पर्स छीना गया

In Karkardooma court complex, lawyers dragged and beat the SHO in broad daylight

नई दिल्ली/एजेंसी। राजधानी दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस के एसएचओ की पिटाई होने की खबर आग की तरह सोशल मीडिया पर फैली। मगर अधिकारिक तौर पर मामले में किसी ने कुछ नहीं कहा। यहां तक की पीड़ित खुद भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार मीडिया के हाथ इस मामले में दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी लगी है। जिसमें एसएचओ की आपबीती दर्ज है।
एफआईआर के मुताबिक, 54 वर्षीय पीड़ित इंस्पेक्टर सीएल मीणा इन दिनों सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के कमला मार्केट थाने में तैनात हैं। सोमवार सुबह वह साल 2014 में शकरपुर थाने में दर्ज हुए धोखाधड़ी के एक मामले में सुनवाई पर आए थे। कोर्ट नंबर 32 में सुनवाई के बाद वह करीब 11:30 बजे वापस लौट रहे थे। आरोप है कि वह अभी कोर्ट कॉम्प्लेक्स बिल्डिंग, पोस्ट ऑफिस के सामने पहुंचे ही थे कि तभी उन्हें आरोपी वकील और उसके साथियों ने घेर लिया। मुख्य आरोपी उनका हाथ खींचकर उन्हें घसीटने लगा और कहने लगा आज हम तुझे छोड़ेंगे नहीं। इसके बाद सभी ने एसएचओ को लात-घूंसे मारने शुरू कर दिए। इस दौरान कई वकील उन्हें घेरे खड़े रहे। वकीलों ने पिटाई कर उनकी वर्दी तक फाड़ दी। एसएचओ जमीन पर गिर गए। फिर भी आरोपी रुके नहीं।
आरोपी उन्हें पीटते रहे और गालियां देते रहे। मुख्य आरोपी ने उनका पर्स भी छीन लिया। जिसमें पीड़ित का आधार कार्ड, सीजीएचएस कार्ड, दिल्ली पुलिस का आईडी कार्ड और करीब सात हजार रुपये कैश थे। पीड़ित के दोनों मोबाइल भी वहां गिर गए। अब कुछ और वकील आए और उन्होंने एसएचओ को भीड़ से बचाकर कोर्ट के गेट नंबर-4 से बाहर किया। एक वकील ने उनके दोनों मोबाइल लौटाए। वकील ने बोला, ये उसे जमीन पर पड़े मिले थे। इसके बाद एसएचओ ने पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल की। हेडगेवार अस्पताल में मेडिकल करवाया और फिर थाने में जाकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी। जिस पर मुख्य आरोपी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि एसएचओ की आरोपियों से कोई पुरानी रंजिश है। किसी गाड़ी को लेकर इनके बीच थाने में बहसबाजी हुई थी। उसी का बदला लेने के लिए मारपीट की गई। गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज हुआ है। मगर उन धाराओं में सात साल से कम सजा होने का प्रावधान है। इस कारण आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस बार को आरोपी के खिलाफ शिकायत देगी। वहीं इस पूरे मामले पर पीड़ित एसएचओ से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैं कुछ नहीं बोल पाउंगा।

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