गोरखपुर जेल में कुंभ स्नान की मची होड़, जेल में बंद कैदियों की मांग, हम भी लगाएंगे आस्था की डुबकी
There is a competition for Kumbh bath in Gorakhpur jail, the prisoners in jail demand, we will also take a dip of faith

- गोरखपुर जिला जेल में बंद कैदियों ने की थी डिमांड
- जेल अधीक्षक ने बोतलों में भरकर मंगाया संगम का जल
- कैदी जेल अधीक्षक के निर्णय पर जताई हुई है खुशी
गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। गोरखपुर जिला कारागार में बंद कैदी भी अब महाकुंभ मेला के भागीदार बनने वाले हैं। वे संगम से लाए गए जल में आस्था की डुबकी लगाने की तैयारी में है। जी हां, यह व्यवस्था कैदियों की आस्था और उनके डिमांड को ध्यान में रखते हुए जेल अधीक्षक की ओर से कराई गई है। इस व्यवस्था के बाद कैदी बेहद प्रसन्न नजर आए। दरअसल, कैदियों ने आस्था की डुबकी की डिमांड की थी। उन्होंने कहा कि हमें भी तृप्ति और पापों से मुक्ति चाहिए। कैदियों की धार्मिक भावनाओं को संज्ञान लेते हुए जेल अधीक्षक ने तीन स्टाफ को भेजकर प्रयागराज से गंगाजल मंगाया है।जेल प्रशासन पानी सप्लाई के माध्यम से टंकी में डालकर कैदियों को स्नान करने की तैयारी है। जेल अधीक्षक के इस निर्णय की कैदी सहित सभी भूरी भूरी प्रशंसा कर रहे हैं। दरअसल, प्रयागराज में संगम स्नान और कुंभ मेले में पहुंचने की चहुंओर होड़ लगी हुई है। आस्था का सैलाब हर तरफ उमड़ा हुआ है। देश, प्रदेश या विदेश सभी जगह से लोग आस्था की डुबकी लगाने प्रयागराज के संगम तट पर पहुंच रहे हैं।
ऐसे में आस्था के संगम रूपी समुंदर में डुबकी लगाने के लिए गोरखपुर की सेंट्रल जेल में बंद कैदी भी आतुर है। उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए जेल अधीक्षक द्वारा कैदियों के लिए विशेष तौर पर प्रयागराज से गंगाजल मंगाया गया है, ताकि जेल में बंद कैदी गंगाजल से स्नान कर अपनी धार्मिक भावनाओं की पूर्ति और पापों से मुक्ति पा सके।
मीडिया से बात करते हुए जेल अधीक्षक वीके पांडेय ने बताया कि जेल में बंद 1911 कैदियों में से ज्यादातर की यह डिमांड थी कि किसी तरह प्रयागराज से गंगाजल मंगा कर उन्हें भी महाकुंभ के अमृत स्नान की अनुभूति कराई जाए। कैदियों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए गोरखपुर जेल से तीन स्टाफ को प्रयागराज भेजा गया था, जो वहां से बोतलों में भरकर गंगाजल लाए हैं। इस जल को पानी सप्लाई वाली टंकी में डाल दिया जाएगा। जेल अधीक्षक ने कहा कि कैदी इससे स्नान कर अपनी धार्मिक भावनाओं और आस्था को शांत कर सकें। उन्होंने कहा कि किसी की धार्मिक भावना और उनका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। कैदियों को वहां ले नहीं जाया जा सकता था, इसलिए यह व्यवस्था कराई गई है। यह जानकर कैदी भी बेहद खुश हैं।




