जीडीए का बड़ा फैसला, अंतरिक्ष ग्रीन कौशांबी के 12 फ्लैट अवैध निर्माण घोषित

बिल्डर ब्लैकलिस्टेड, अवैध निर्माण पर नियमानुसार कार्यवाही का आदेश

गाजियाबाद ब्यूरो। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर जीडीए ( गाजियाबाद विकास प्राधिकरण) ने एक लैंडमार्क निर्णय दिया है जिसमें अंतरिक्ष ग्रीन सोसाइटी कौशांबी गाजियाबाद के 12 फ्लैट्स को अवैध निर्माण घोषित किया है। सोसायटी के एक निवासी द्वारा दायर की गई महादेश (मैंडेमस) याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जीडीए को आदेश दिया था कि वह 6 सप्ताह के भीतर बिल्डर द्वारा किए गये कथित अवैध निर्माण पर अपना निर्णय दे। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए जीडीए के उपाध्यक्ष श्री अतुल वत्स, आइ ए एस ने संपूर्ण विषयों की गहन समीक्षा और अध्ययन के बाद अपना चार पृष्ठ का आदेश दिया है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष ग्रीन कौशांबी के बिल्डर अंतरिक्ष इंजीनियर कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने जीडीए द्वारा दिए गए 100 फ्लैट अनुमति के विरुद्ध 132 फ्लैट बनाए जिसके कारण 32 फ्लैट एक या दूसरे नियम विरूद्ध है। जीडीए के आदेश के अनुसार बिल्डर ने स्टिल्ट पर (जिसे बिल्डर ने ग्राउंड फ्लोर नाम दे दिया है) 6 फ्लैट बनाए हैं जो पूरी तरह अवैध हैं। नैशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार स्टिल्ट पर कोई निर्माण नहीं सकता। मानचित्र के ऊपर यह स्थान पार्किंग के लिए छोड़ा गया था जिस पर बिल्डर ने 6 फ्लैट बना दिए। जीडीए ने प्रथम तल से 12 तल तक के निर्माण की अनुमति दी गई थी लेकिन बिल्डर ने स्टिल्ट पर 6 फ्लैट बनाने के अलावा 13वां मंजिल (अप्रूवल के विरुद्ध एक और तल) पर भी 6 फ्लैट बनाएं। इस तरह स्टिल्ट पर बने 6 और तेरहवीं मंजिल पर बने 6 फ्लैट पूरी तरह से अवैध है जबकि तृतीय तल से लेकर 12वीं तक दो फ्लैट को चार फ्लैट में डिवाइड कर बेच दिया है। परिणाम स्वरूप अप्रूव्ड 100 की जगह 120 फ्लैट निकाले गए हैं।
जीडीए उपाध्यक्ष ने ज़ोनल अधिकारी को 3 महीने के भीतर नियमानुसार कार्यवाही करके इस अवैध निर्माण को समाप्त करने का आदेश दिया है जिसकी परिणति स्टिल्ट के फ्लैट्स को तोड़े जाने में हो सकती है। चूंकि पार्किंग की जगह फ्लैट बना दिए गये हैं इसलिए सोसायटी में पार्किंग को लेकर आयें दिन लड़ाई-झगड़ा होता रहता है। पार्किंग को लेकर हुए झगड़े में अनेक गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गये। इस आदेश के परिणाम स्वरूप स्टिल्ट पर पार्किंग उपलब्ध होने से पार्किंग की समस्या सुलझ सकती है। अभी ऐसे एक दर्जन से अधिक फ्लैट हैं जिनकी पार्किंग बिल्डर ने पेपर पर दी है लेकिन जमीन पर उपलब्ध नहीं कराई है।

 

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