फर्जी गैंगरेप केस में फंसे टीवी मैकेनिक के बेटा और बेटी ने वकील बन लड़ा मुकदमा,11 साल बाद सभी आरोपी बरी
Son and daughter of a TV mechanic caught in a fake gangrape case fought the case as lawyers, all accused acquitted after 11 years

- पॉक्सो कोर्ट में साबित नहीं हो पाया गैंगरेप का मामला, सभी आरोपी बरी
- गैंगरेप के एक आरोपी ने न्याय पाने के लिए बेटे-बेटी को कराई वकालत की पढ़ाई
कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर से फर्जी गैंगरेप कैस के आरोपी को बरी किए जाने का मामला सामने आया है। दरअसल, 11 साल पहले एक टीवी मैकेनिक और दो अन्य लोगों को फर्जी गैंगरेप केस में फंसा दिया गया था। इस मामले में तीनों को एक साल जेल में भी रहना पड़ा। अब टीवी मैकेनिक के बेटा और बेटी ने वकील बनकर उन पर लगे दुष्कर्म के कलंक को धो दिया। आरोपी ने खुद पर लगे कलंक को धोने के लिए बेटे और बेटी को कानून की पढ़ाई कराई। उन्होंने कोर्ट में कानूनी लड़ाई और अब जाकर उन्हें न्याय मिला है। कानपुर में इस मामले की खूब चर्चा हो रही है।पिता पर गैंगरेप कसे होने और जेल जाने के बाद उनके बेटा और बेटी को गहरा धक्का लगा। वह जानते थे कि पिता बेकसूर हैं। उन्हें ऐसे मामले में सजा झेलनी पड़ रही है, जिसमें उनकी संलिप्तता ही नहीं है। इसके बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई का निर्णय लिया। दोनों वकील बने। इसके बाद पिता को बचाने के लिए बेटे ने अपना वकालतनामा लगाकर पिता की कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उन्हें दोष मुक्त करार दिलाया।
गैंगरेप के झूठे आरोप में फंसे तीन आरोपियों को कानपुर के अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट योगेश कुमार की कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। इसी मामले में पीड़िता और उसके परिवार को धमकाने की आरोपी महिला को भी बरी कर दिया गया है। गैंगरेप केस के एक आरोपी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत भी हो चुकी है। गैंग रेप का मामला बिठूर के सूबेदार नगर निवासी अरुण गोस्वामी, ब्रह्मनगर निवासी दीपू गुप्ता और रमेल नगर निवासी अनिल कुमार गौड़ पर दर्ज कराया गया था। उन पर आरोप था कि इलाके की 14 वर्षीय किशोरी को घर में अकेला पाकर तीनों ने उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़ित के पिता ने कोर्ट के आदेश पर 25 मार्च 2013 को बिठूर थाने में पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
शिकायत में रिपोर्ट दर्ज करने जा रही पीड़िता और उसके माता-पिता को रोक कर अरुण गोस्वामी, उसकी मां तपेश्वरी और पिता शंकरदयाल की ओर से धमकाने का भी आरोप लगाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शंकरदयाल की मौत हो चुकी है। वहीं, सबूत और गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने बाकी चारों को दोषमुक्त करार दिया। अरुण कुमार गौड़ ने रेप का आरोप लगाने के बाद अपने बेटे ऋषभ गौर और बेटी उपासना गौर को वकालत की पढ़ाई कराई। दोनों को वकील बनाया। अब दोनों ने पिता पर लगे कलंक को हटाने में मदद की। सुनवाई के दौरान अनिल के मुकदमे की पैरवी उनके बेटे ऋषभ गौर और बेटी उपासना ने की। कोर्ट के सामने ऋषभ ने अपना वकालतनामा भी लगाया।
ऋषभ ने इसके बाद उपासना की मदद से अपने पिता को बेगुनाह साबित करने की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कोर्ट में पिता के लिए बहस की। पक्ष को मजबूती के साथ रखा। इस कारण कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। सीनियर वकील मनोज त्रिवेदी ने कहा कि अभियोजन घटना को साबित नहीं कर सका। इस कारण सभी आरोपी बरी हो गए हैं। केस एक आरोपी के बेटे और बेटी ने लड़ा।
गैंगरेप केस में तीनों आरोपी अरुण गोस्वामी, दीपू गुप्ता और अनिल कुमार गौड़ को जेल भी जाना पड़ा। फर्जी मुकदमे में उन तीनों एक साल तक जेल में रहना पड़ा। इसके बाद जमानत पर तीनों को छोड़ा गया। जेल से बाहर आने के बाद अनिल कुमार गौड़ ने अपने बच्चों को वकील बनाया। अब उन्होंने अपनी पैरवी से पिता को न्याय दिला दिया।




