कानपुर में वैलेंटाइन डे पर पुलिस ने साइबर प्रेमी जोड़े को दबोचा, श्रम विभाग के पोर्टल से की 1.7 करोड़ की ठगी

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर में श्रम विभाग को साइबर प्रेमी जोड़े ने करोड़ों की चपत लगाई। वैलेंटाइन डे के दिन पुलिस प्रेमी जोड़े समेत 6 आरोपियों को अरेस्ट किया है। साइबर ठगों ने श्रम विभाग के पोर्टल से अपने साथियों के साथ मिलकर 1.7 करोड़ रुपए की धनराशि बोगस अकाउंट्स में ट्रांसफर कर ली थी। अपर श्रमायुक्त कानपुर मंडल कल्पना श्रीवास्तव ने साइबर थाने में बीते एक फरवरी को एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में आरोपियों को दबोचने के लिए सर्विलांस, स्वाट और साइबर एक्सपर्ट की चार टीमें बनाई गई थीं। पुलिस ने यूपी और छत्तीसगढ़ से आरोपियों को अरेस्ट किया है।
श्रम विभाग के यूपीबीओसीडब्ल्यू द्वारा संचालित कन्या विवाह सहायता योजना में फर्जी आवेदन किया गया था। अपात्रों की आईडी और अधिकारियों के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल करते हुए फर्जी 196 अपात्र श्रमिकों के खातों में साइबर ठगों ने 1.7 करोड़ की धनराशि ट्रांसफर कर ली थी। जब इसकी जानकारी श्रमायुक्त कानपुर मंडल कल्पना श्रीवास्तव को हुई तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने फौरन इसकी साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपियों के पास से डिजिटल इलेक्टॉनिक डिवाइस, फर्जी कागजात बरामद किए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने ट्रांसफर की गई 1.7 करोड़ में से 64 लाख की रकम को फ्रीज करा दिया था।
प्रेमी जोड़े ने दिया वारदात को अंजाम
डीसीपी क्राइम आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस पूरी घटना का मास्टर माइंड उदित मिश्रा है। उदित पूर्व में घाटमपुर सजेती में कॉल सेंटर चलाता था। इस गैंग में उदित की महिला मित्र नैंसी ठाकुर, मुनाजिर, अर्जान, यासीन ललित कश्यप, मस्तान और विनय दीक्षित शामिल थे। उदित की महिला मित्र नैंसी ठाकुर कम्प्यूटर साइंस से बीटेक है। इसके साथ ही उदित ने यूट्यूब और अन्य माध्यमों से साइबर सिक्योरिटी के ऑनलाइन कोर्स किए हैं। श्रम विभाग की वेबसाइट की सुरक्षा खामियों के कई बाईपास तलाश लिए थे। उदित श्रम विभाग की वेबसाइट में आने वाली टेक्निकल फाल्टों को दूर करने का काम करता था। एक श्रमिक की बेटी की शादी का 55 हजार अनुदान दिया जाता है। इसी तरह से साइबर ठगों ने 1.7 करोड़ की धनराशि ट्रांसफर कर ली थी।
डिजिटल हस्ताक्षर को किया था कॉपी
उन्होंने बताया कि श्रम विभाग कभी-कभी वेबसाइट की खामियों को दूर करने के लिए भी काम करता था। इसी वजह से उदित वेबसाइट की खामियों को भलीभांति समझ गया था। उसने अपने साथियों की मदद से बोगस अकाउंट्स बनाए थे। यह अकाउंट्स उनके थे, जो अपात्र थे। ट्रेजरी ऑफिसर के डिजिटल हस्ताक्षर लेकर पैसों को ट्रांसफर किया गया। पुलिस ने नैंसी ठाकुर, उदित ठाकुर, अंकित मिश्रा, मो. यासीन, ललित कश्यप, विनय दीक्षित को अरेस्ट किया है। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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