मौत भी इनके सामने हार गई, दिल्ली पुलिस का वो आईपीएस जिसके जज्बे ने कैंसर से दो बार जीती जंग

Even death lost to him, the IPS of Delhi Police whose spirit won the battle against cancer twice

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली पुलिस के डीसीपी यंग आईपीएस निधिन वाल्सन। यूं समझ लें कि शख्सियत एक और किरदार दो। एक किरदार वो, जो क्राइम को कंट्रोल करता है। दूसरा किरदार वो जो ‘कैंसर, कोविड, कीमो और कॉकटेल’ के साथ आरपार की फाइट कर चुका है। जी हां, कैंसर भी स्टेज 4 का। तीन साल में एक बार नहीं, बल्कि दो बार कैंसर हुआ। इसी साल जून महीने में ‘बोन मैरो ट्रांसप्लांट’ की बेहद पेनफुल सर्जरी से गुजरने के बाद अब डीसीपी निधिन ‘कैंसर फ्री’ हो चुके हैं। इन सबके बीच, खतरनाक कैंसर के साथ आईपीएस निधिन की जिंदगी के चार साल कैसे गुजरे। कैसे वह ‘मौत को मात’ देकर लौटे। हर दिन के एक-एक दर्दनाक किस्से को कागजों पर उतारा। उनकी यही मेहनत अब कैंसरमैन टू आयरनमैन: ए पुलिस ऑफिसर्स जर्नी ऑफ अरेस्टिंग इलनेस नाम की किताब के रूप में दुनिया के सामने है। गोवा के सीएम, क्रिकेटर युवराज सिंह और अन्य जानी-मानी हस्तियों ने इनकी किताब को प्रेरक बताया है।
मीडिया से बातचीत में उन चार साल के मुश्किल दिनों का जिक्र करते हुए डीसीपी निधिन और वाइफ रम्या इमोशनल हो गए। दिसंबर 1985 में जन्मे निधिन केरल के कन्नूर जिले से हैं। परिवार में पिता सीपी वाल्सन बीएसएनल से रिटायर हुए हैं, मां यू चंद्री वाल्सन, पत्नी रम्या और एक बेटा-बेटी हैं। 2012 बैच के आईपीएस (यूटी कैडर) हैं। पहली पोस्टिंग 2014 में बतौर एसीपी सरिता विहार। उसके बाद आउटर और रोहिणी जिले के अडिशनल डीसीपी रहे। उसके बाद 2017 में लक्षद्वीप ट्रांसफर हुआ। वहां तीन साल रहने के बाद गोवा (एसपी क्राइम) की पोस्टिंग हुई। 2020 में कोरोना की शुरुआत थी, तभी अचानक बॉडी में बहुत दर्द होना शुरू हुआ। चार-पांच दिन के बाद जब डॉक्टर को दिखाया तो मालूम चला कि स्टेज 4 का कैंसर है।
दो ही रास्ते थे-फाइट या मौत के सामने सरेंडर
कैंसर का डायग्नोस होना मेरे और परिवार के लिए बहुत भयावह था। इलाज भी बहुत मुश्किल। दो ही रास्ते थे- ‘जिंदगी से जंग’ या ‘मौत के सामने सरेंडर’। मैंने फाइट को चुना। अगर कैंसर को हराता हूं तो मैं दुनिया को बता सकूंगा कि कोई ठान ले तो कुछ भी कर सकता है। कैंसर ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल में भर्ती हुआ। दो बार कोविड हुआ। पास में कोई नहीं। असहनीय दर्द के कारण रात भर बैठकर बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोता था। कीमोथैरेपी वॉर्ड में एक साल के कैंसर रोगी बच्चे को देखा। उसकी मां देखभाल करती थी। उन्होंने मुझे कहा, लड़ाई दिमाग में है। अगर तुम यहां हार मानोगे तो लड़ाई हार जाओगे। मैंने ठान लिया कि हार नहीं मानूंगा। 9 कीमोथैरेपी, एंटी बॉडी कॉकटेल लेना पड़ा। सूरत बदल चुकी थी। एसपी क्राइम गोवा रहते हुए देश के चर्चित केस ‘कंपनी सीईओ ने बच्चे की हत्या की’… उस केस को कैंसर रहते हुए सुलझाया।
ट्रीटमेंट के बाद 2023 में कैंसर ने फिर से अटैक किया। पीठ पर एक बड़ी गांठ उभर आई। बायोप्सी हुई। रिपोर्ट्स में फिर से कैंसर। मन में सबसे पहला यही सवाल- मैं ही क्यों?। रिपोर्ट्स को अलमारी में लॉक कर दिया। क्योंकि वाइफ फिर से यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। बेहद असहनीय 15 दिन गुजरे। उन 15 दिनों में कई बार स्यूसाइड का खयाल आया। मगर, पत्नी और बच्चों के चेहरों को देखकर टूट गया। आखिरकार मैंने वाइफ को सब कुछ बता दिया। वाइफ मेरी ताकत बनी। NBT से बातचीत में रम्या बोलीं, जब पहली बार पता चला। तब ऐसा लगा मानो, सब कुछ बिखर गया। मैं यही सोचती रही कि निधिन प्योर वेजिटेरियन हैं। कुछ भी ऐसा नहीं पीते जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो। रोज 5 किलोमीटर रनिंग करते हैं। फिर भी ऐसा क्यों? वो कोरोना का शुरुआती समय था। हमें कोविड और कैंसर दोनों से ही लड़ना था। इसी साल एम्स में बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ। अब वह कैंसर फ्री हैं। रिकवरी चल रही है।

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