हिंडन में पॉल्यूशन को लेकर गाजियाबाद म्युनिसिपल कमिश्नर के खिलाफ दर्ज हुआ केस

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद गाजियाबाद नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के खिलाफ हिंडन में प्रदूषण को लेकर मामला दर्ज कराया है। 9 जुलाई को ट्रिब्यूनल के समक्ष दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि मलिक के खिलाफ लखनऊ के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (वायु एवं जल प्रदूषण) की अदालत में बीएनएस धारा 358 के तहत मामला दर्ज कराया गया है।
अदालत ने 3 अगस्त को मामले की सुनवाई करेगी। मई में ट्रिब्यूनल ने यूपीपीसीबी से जवाब मांगा था, जब उसने नदी को प्रदूषित करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए नगर आयुक्त के बजाय जीएमसी के जल विभाग के महाप्रबंधक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह मामला तब दर्ज कराया, जब एनजीटी ने मार्च 2023 में नदी में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।
गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिलों के 55 उद्योगों के साथ-साथ छह शहरी स्थानीय निकाय- सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद के अलावा नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ भी आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इन इलाकों से होकर ही ये नदी गुजरती है।
आपको बता दें कि एनजीटी में दिसंबर के दूसरे हफ्ते में पर्यावरण मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जमा की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अक्टूबर में गाज़ियाबाद की कैलाभट्टा, अर्थला ड्रेन, इंदिरापुरम ड्रेन, प्रताप विहार ड्रेन, डासना ड्रेन और करहेड़ा ड्रेन के अलग-अलग सैंपल अक्टूबर में लिए गए थे, उनमें पानी के पीएच वैल्यू को छोड़कर बीओडी और सीओडी मानकों के अनुसार नहीं मिले हैं। इसका रंग भी खराब मिला। इनमें करहेड़ा का हाल सबसे खराब है। यहां हिंडन में ज्यादा पानी प्रदूषित हो रहा है। करहेड़ा के पास बीओडी जहां 56.2 mg/l और सीओडी 149 mg/l बाकी जगहों पर यह आंकड़े इससे कहीं कम हैं। वहीं, मिनिस्ट्री ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि पिछले साल की तुलना में इस साल हिंडन नदी के पानी की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ है। फिर भी इस दिशा में अभी बहुत काम करने की जरूरत है।




