प्रैक्टिस से लौटते वक्त टूट गया पैर,देश के लिए मेडल लाने वाले तलवारबाज को मदद की आस

रायपुर,(छत्तीसगढ़)। देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी जब दाने-दाने को मोहताज होते हैं, तब उन्हें देखकर मन में अजीब सी टीस पैदा होती है। बात जब दिव्यांग खिलाड़ियों की आती है तो उनके खेल और जज्बे पर हर एक नागरिक का सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है। कई बार परिस्थितियों की मार खिलाड़ियों पर ऐसी पड़ती है कि खुद दुख के पहाड़ तले दब जाते हैं। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाले हरिहरन सिंह राजपूत नामक दिव्यांग की है। परिवार में आठ सदस्य है। छोटे वाले भाई का भी निधन हो गया है। उसके भी दो बच्चे हैं, जिसे हरिहरन ही देखते है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि पिता के गोलगप्पे के दुकान से खर्च चल रहा है।व्हीलचेयर तलवारबाजी के माहिर खिलाड़ी हरिहरन सिंह राजपूत पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। इनकी गिनती प्रतिभावन खिलाड़ियों में होती है। वहीं, बिलासपुर के हरिहरन सिंह राजपूत ने कई मौकों पर देश का नाम रोशन किया है। व्हीलचेयर तलवारबाजी में हरिहन राजपूत ने कई गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते हैं। राज्य का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ी की स्थिति अभी बद से बदतर हो गई है। खेल तो दूर इस खिलाड़ी के सामने हर दिन परिवार पालने की चुनौती है।

पैर की हड्डी टूटने के बाद घर पर बैठे हरिहरन
दरअसल, दुर्घटना में पैर की हड्डी टूटने के बाद से ही हरिहरन सिंह राजपूत दो वक्त की रोटी के लिए भी जूझते नजर आ रहे हैं। हरिहरन सिंह ने इटली के पीसा में हुए अंतरराष्ट्रीय तलवारबाजी वर्ल्ड कप में देश का नाम रोशन करते हुए प्रतियोगिता में 22 वां रैंक हासिल किया था। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के कई प्रतियोगिताओं में हरिहरन सिंह ने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते हैं। उनके इस हौसले और जज्बे के लिए उन्हें राज्य में खिलाड़ियों को मिलने वाले मुख्यमंत्री अवॉर्ड से भी सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। कुछ दिनों पहले प्रैक्टिस से अपने घर आ रहे तलवारबाज हरिहरन सिंह अचानक रास्ते पर फिसलकर गिर गए। इस दौरान उनकी जांघ की हड्डी टूट गई। इसके बाद इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचे डॉक्टरों ने उन्हें 3 महीने और बेड रेस्ट के लिए कहा है। इस वजह से अब हरिहरन के पास जीवन यापन के संसाधनों की कमी होने लगी है। इसके अलावा भाई की मौत के बाद उनके दो बच्चे और खुद के दो बच्चों को पालने की जिम्मेदारी भी है। दुर्घटना के बाद वह असहाय नजर आ रहे हैं। हरिहरन सिंह राजपूत ने बताया कि सबसे पहले मेरा चयन भुवनेश्वर ओडिशा में हुआ था। वहां मुझे सिल्वर मेडल मिला था। इसके बाद आगे का सफर जारी है। उसके बाद से लगातार 10-12 सालों तक खेला है। नेशनल में चेन्नई, ओडिशा, भुवनेश्वर, हरियाणा, मणिपुर और इंफाल समेत 10 जगहों पर नेशनल मैच खेले हैं। इनमें गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मिलाकर 20 मेडल जीते हैं। उन्होंने कहा कि लास्ट टाइम मेरा सेलेक्शन इटली के लिए हुआ था। वर्ल्डकप के लिए 18 नवंबर 2021 में सेलेक्शन हुआ था।
इटली में आया 22वां रैंक
हरिहरन ने बताया कि हरियाणा में कैंप लगा था। 45 दिनों तक वहां फिर इटली गए, जहां 22वां रैंक मिला था। अभी घर की स्थिति बहुत दयनीय है। जांघ की हट्टी टूट कर दो भागों में बंट गया है। उसका ऑपरेशन कराया हूं, अभी बेड रेस्ट है। डॉक्टर ने दो-तीन महीने बेड रेस्ट कहा है। कमाई कहीं से नहीं है। मैं अकेले कमाने वाला हूं। मेरे परिवार में आठ लोग रहते हैं। छोटे वाले भाई का भी निधन हो गया है। उसके भी दो बच्चे हैं, जिसे भी मुझे देखना पड़ता है। उनकी पढ़ाई लिखाई भी सही है। पिताजी पानीपुरी बेचते हैं, उससे घर का खर्च चल रहा है।
इसके साथ ही खिलाड़ी ने कहा कि कुछ राज्यों में सरकार से मदद मिलती है। हमें भी राज्य सरकार से मदद की आस है। हरिहरन की पत्नी खुशबू राजपूत ने कहा कि इलाज के लिए हमलोग दूसरे कर्ज लिए हैं। थोड़ा आयुष्मान कार्ड से मदद मिली है। अभी बहुत ज्यादा स्थिति ठीक नहीं है। मैं प्रशासन से यही चाहती हूं कि हमारी आर्थिक स्थिति गंभीर है और पहले जैसे भी चल रहा था। अब बहुत तकलीफ में गुजर बसर हो रहा है। प्रशासन से उम्मीद है कि पति को छोटा-मोटा काम मिल जाए।दो हमारे बच्चे है उसके साथ देवर के भी दो बच्चो का भी पालन पोषण हम कर रहें हैं।और ससुर जी के गुपचुप ठेला से ही हमलोगों का खर्चा थोड़ा बहुत चल रहा है।प्रशासन से यही उम्मीद है की मेरे पति के लिए छोटा-मोटा जाब दिलाने की कोशिश करें यही उम्मीद है।

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