यमुना में सीवर का गंदा पानी छोड़ने पर एनजीटी का तगड़ा ऐक्शन, नगर निगम पर लगाया 58.39 करोड़ का जुर्माना

आगरा/उत्तर प्रदेश। कल-कल बहती कालिंदी को मैला कर दिया है। अवरिल यमुना की धारा में अब सिर्फ गंदा व सीवर का पानी बहता है। इस कारण से यमुना में रहने वाले जलचर (मछलियां आदि) मर रहे हैं। यमुना की इस हालत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नगर निगम आगरा पर 58.39 करोड़ का जुर्माना ठोका है। आगरा के साथ-साथ मथुरा नगर निगम पर भी 7.20 करोड़ का जुर्माना लगा है। बुधवार को एनजीटी ने ये आदेश चिकित्सक संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका पर किया है। जुर्माने की राशि 3 माह के भीतर उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को जमा करानी होगी।
जिन्होंने यमुना को वास्तविक रुप में देखा होगा। वे आज इसकी दुर्दशा को देखकर काफी चिंतित और दुखी होंगे। यमुना नदी के बजाए नाले में तब्दील हो गई है। यमुना में सीवर का गंदा पानी सीधे गिर रहा है। हालत यह है कि यमुना किनारे से दूसरे किनारे तक गंदगी और कीचड़ दिखाई देती है। पानी के नाम पर सीवर का गंदा पानी बह रहा है। जिसमें भैंसे नहलाई जाती हैं। घाटों पर धोबी गंदे कपड़े धोते हैं। फैक्ट्रियों, हॉस्पिटलों और होटलों का गंदा पानी भी नालों के जरिए यमुना में आ रहा है। इस वजह से यमुना में प्रदूषण फैल गया है। यमुना में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। जिसके कारण मछलियां व अन्य जलचर मर रहे हैं।
चिकित्सक डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका पर प्रिंसीपल बेंच के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल और एक्सपर्ट मेंबर सेंधिल वी ने आदेश में कहा है कि यमुना में प्रदूषण के मामले में आगरा नगर निगम और मथुरा नगर निगम को 288 दिनों के लिए पर्यावरण की क्षतिपूर्ति करनी होगी। इसके लिए दोनों को जुर्माने की राशि 3 महीने के अंतराल में यूपीपीसीबी को जमा करानी होगी। एनजीटी ने कहा है कि उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल अधिनियम 1974 की धारा 24 के साथ धारा 43 और नदी गंगा आदेश 2016, ईपी अधिनियम 1986 की धारा 15,16,17 और 19 के तहत अपराध करने पर दंडात्मक कार्रवाई भी करेगा।
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि जुर्माने की धनराशि का उपयोग आगरा, मथुरा और वृंदावन के पर्यावरण सुधार में खर्च की जाएगी। कायाकल्प योजना के आधार पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिले के डीएम की निगरानी में कमेटी बनाई जाएगी।
डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने अपनी याचिका में कहा था कि सीवर और केमिकल युक्त पानी से यमुना का पानी जहरीला हो गया है। जिसमें घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। इस वजह मछलियां व अन्य जलचर मर रहे हैं। उन्होंने 16 नवंबर 2021 और 22 जुलाई 2021 को यमुना में मरी हजारों मछलियों का ब्योरा भी दिया है। उन्होंने कहा है जिन विभागों को प्रदूषण को रोकने का जिम्मा दिया है। वे निष्क्रिय हो गए हैं। नदी को नाला बना दिया गया है।

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