खालिस्तानी गुरपतवंत पन्नू के खिलाफ इंटरपोल ने खारिज किया भारत का अनुरोध

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क।  इंटरपोल ने कनाडा स्थित संस्थापक और खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कानूनी सलाहकार के खिलाफ आतंकी आरोपों पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के भारत के दूसरे अनुरोध को खारिज कर दिया। अब इसको लेकर वजह सामने आई है। इंटरपोल के धार्मिक महत्व के मामलों में दखल नहीं देने से जुड़ा नियम है। जिसकी जानकारी इंटरपोल के सेक्रेटरी जनरल ने खुद ही न्यूज 18 के साथ बातचीत में साझा की है।

मीडिया से बात करते हुए इंटरपोल के महासचिव जुर्गन स्टॉक ने कहा कि वो व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे, लेकिन उन्होंने इसके साथ ही कहा कि संगठन के लिए किसी भी गतिविधि में प्रवेश करना सख्त मना है जिसमें मुख्य रूप से राजनीतिक, सैन्य, धार्मिक या नस्लीय मामलों से संबंधित होते हैं। तथ्यों के मामले में हम ऐसे मामलों से दूर रहते हैं। इसके साथ ही सहयोग के लिए सदस्य देशों अनुरोधों को अस्वीकार कर देते हैं। इंटरपोल संविधान के अनुच्छेद 3 में कहा गया है कि संगठन के लिए राजनीतिक, सैन्य, धार्मिक या नस्लीय चरित्र के किसी भी हस्तक्षेप करने की सख्त मनाही है।

बता दें कि बीते दिनों टरपोल ने कनाडा स्थित संस्थापक और खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कानूनी सलाहकार के खिलाफ आतंकी आरोपों पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के भारत के दूसरे अनुरोध को खारिज कर दिया था। इंटरपोल ने स्वीकार किया कि पन्नून एक “हाई-प्रोफाइल सिख अलगाववादी” है और एसएफजे एक ऐसा समूह है जो एक स्वतंत्र खालिस्तान की मांग करता है। फिर भी, उन्होंने कहा, यह निष्कर्ष निकाला है कि पन्नून की गतिविधियों का एक “स्पष्ट राजनीतिक आयाम” है, जो इंटरपोल के संविधान के अनुसार रेड कॉर्नर नोटिस का विषय नहीं हो सकता है।

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