जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने हिंदी में की कानूनी शिक्षा की पैरवी, योगी के सामने कबीर का दोहा पढ़ चुप्पी पर भी बोल गए

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पहले शैक्षिक सत्र का शुक्रवार को उद्‌घाटन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सबकी भलाई होना चाहिए। यह तभी संभव है जब स्थानीय भाषाओं में शिक्षा दी जाए। इसके लिए कानून की शिक्षा भी स्थानीय भाषाओं में दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी तक अधिकतर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी जानने वाले और संपन्न वर्ग के अनुकूल वातावरण है। ऐसा नहीं होना चाहिए। शिक्षा के लिए आर्थिक और सामाजिक स्थिति बाधक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नए विधि विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम से ही कानून की शिक्षा दी जानी चाहिए। जिससे किसी भी बैकग्राउंड से आने वाला छात्र उसे बेहतर तरीके से समझ सके। भाषा की बाध्यता न्याय की पहुंच को दूर करती है। इसके साथ ही उन्होंने कबीर दास के दोहे का जिक्र कर चुप्पी पर भी अपनी बात रखी।
सुप्रीम कोर्ट में अपनी पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाषिनी सॉफ्टवेयर की मदद से हमने 1950 से 2024 तक के 36 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद करवाया है। इसका मकसद अंग्रेजी न जाने वालों तक कानून की जानकारी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में करीब 3 वर्ष तक चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत रहे। इस दौरान कई वकील हिंदी में बहस करते थे तब भी वह अपनी बंबइया हिंदी में उनसे बात करते थे।

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