चंदौली में एम्स सॉफ्टवेर से डीआरएम ऑफिस में तैनात क्लर्क ने 3.61 करोड़ों का किया घोटाला

चंदौली/उत्तर प्रदेश। चंदौली की मुगलसराय पुलिस ने डीआरएम ऑफिस में तैनात क्लर्क युवराज सिंह को रेलकर्मियों के एकाउंट से छेड़छाड कर पैसा हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरपीएफ सिपाही के फंड का पैसा दूसरे के खाते में जाने से पूरा मामला पकड़ में आया था। एसपी डॉ. अनिल कुमार ने निर्देश पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी। अब तक की जांच में करोड़ों की हेराफेरी होने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार रेलवे सुरक्षा बल पीडीडीयू के सहायक सुरक्षा आयुक्त हरिनारायण राम ने बीते 1 नवंबर को मुगलसराय थाने पर लिखित तहरीर दी थी। उन्होंने 17 अक्टूबर को आरक्षी मो. मुजीब के पीएफ खाते से 92 हजार रुपये निकासी के लिए बिलिंग क्लर्क को प्रार्थना पत्र देकर आवेदन किया था। 17 अक्टूबर को ही मुख्यालय हाजीपुर अग्रसारित हो गया और 17 अक्टूबर को धनराशि आवंटित कर दी गई। हालांकि ये पैसा मो. मुजीब के खाते में नहीं आया।
3.61 करोड़ का फ्रॉड
19 अक्टूबर को कार्यालय अधीक्षक के यहां से जानकारी की गई तो पता चला कि पैसा 17 अक्टूबर को ही आवेदक के खाते में भेज दिया गया है। अभियुक्त युवराज सिंह ने मो. मुजीब के खाते के स्थान पर अपनी पत्नी नीतू का खाता दर्ज किया था। इससे वो पैसा उसकी पत्नी के खाते में चला गया। बैंक से पे-स्लिप निकलवाने पर गबन की जानकारी हुई। इसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी ने रेलवे अधिकारी और कर्मचारियों का 3,61,91,217 रुपये अपने और अपने पत्नी के खाते में ट्रांसफर कर लिया।
पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान अभियुक्त युवराज सिंह ने बताया गया कि वो 2006 में आरपीएफ में आरक्षी के पद पर नियुक्त हुआ था। मेडिकल अनफीट होने के कारण वह 2017 में क्लर्क के पद पर नियुक्त हो गया। अभियुक्त ने बताया कि वह आरपीएफ अधिकारी और कर्मचारियों का वेतन बनाता था। युवराज के द्वारा बनाया गया बिल, सेक्सन में मौजूद अधिकारियों के जांच के बाद आंकिक शाखा में जाता था। जहां से दोबारा अधिकारी और सेक्शन आफिसर द्वारा चेक करने के बाद सहायक मंडल वित्त प्रबंधक द्वारा बिल को पास कर पेमेंट किया जाता था। इसके बाद संबंधित के खाते में पैसा चला जाता था।
पत्नी का खाता भी करता था इस्तेमाल
युवराज ने बताया कि साल 2016 में एम्स (अकाउंटिंग इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम) सॉफ्टवेयर आया। इसमें वह, किसी कर्मचारी का पैसा, ज्यादा भरकर लगा देता था तो उसे कोई पकड़ नहीं पाता था। इसी सिस्टम के माध्यम से संबंधित कर्मचारी के खाता नंबर बदल कर वह ज्यादा पैसा अपनी पत्नी और अपना खाता नंबर डाल देता था। फिर संबंधित कर्मचारी की उचित धनराशी को अपने खाते से कर्मचारी के खाते में ट्रांसफर कर देता था। इससे उस कर्मचारी को पता नहीं चल पाता था और न ही ऊपर के अधिकारी इस बात को पकड़ पाते थे।
एक गलती से पकड़ा गया
पुलिस के अनुसार अभियुक्त को पूरा यकीन था कि यह मामला पकड़ में नहीं आएगा। आरक्षी मुजीब का पीएफ भरने के बाद अभियुक्त ने पैसा बढ़ाकर अपने पत्नी की अकाउंट में तो डाल दिया। फिर आरक्षी के खाते में पैसा ट्रांसफर करना भूल गया, जिससे पूरे मामले का पर्दाफास हो गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसने करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। इस बाबत एसपी ने बताया कि अभियुक्त से पूछताछ सहित अन्य विधिक कार्रवाई जारी है।

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