आतंकियों से हत्या करवाने के केस में वकील गिरफ्तार

श्रीनगर/एजेंसी। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मियां अब्दुल कयूम भट्ट को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर 2020 में वकील बाबर कादरी पर हुए घातक आतंकवादी हमले की साजिश रचने का आरोप है। भट्ट ने 1993 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सैयद अली शाह गिलानी गुट के गठन का नेतृत्व किया था। उनके दामाद जावेद इकबाल वानी हाई कोर्ट के जज हैं। भट्ट एक अलगाववादी नेता हैं और कई बार जेल जा चुके हैं। उन्हें 1990 में लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और 1992 तक जेल में रखा गया था।
घाटी में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के आरोप में उन्हें 2008 और 2010 में दो बार फिर से गिरफ्तार किया गया था। 5 अगस्त, 2019 को जिस दिन अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय कर दिया गया था, उन्हें PSA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 2021 में ही रिहा किया गया था जब उन्होंने अलगाववादी गतिविधियों में शामिल नहीं होने का वचन दिया था।
कादरी ने लगाया था भट्ट पर आरोप
कादरी उनके लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी थे, जिन्होंने बार एसोसिएशन पर भट्ट की पकड़ को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि भट्ट ने चुनावों में हेरफेर करके वर्षों तक अपने पद पर कब्जा जमाए रखा। भट को जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने गिरफ्तार किया था और धारा 302 (हत्या) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। सितंबर 2020 में कादरी की उनके श्रीनगर स्थित घर पर दो आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, जो मुवक्किल बनकर आए थे।
कादरी पर पहले भी हुआ था हमला
अपनी हत्या के कुछ दिन पहले कादरी ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि कैसे भट्ट ने बार चुनावों में धांधली की थी। इससे पहले, कादरी 2018 में एक हत्या के प्रयास में बाल-बाल बच गए थे। कादरी के परिवार के जमात-ए-इस्लामी से संबंध थे। भट्ट की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश जारी किया जिसमें जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनावों को रोक दिया गया। ये चुनाव 27 जून को होने वाले थे। प्रशासन ने श्रीनगर में निचली अदालत परिसर में धारा 144 भी लागू कर दी है जहां चुनाव होने वाले थे।
भट्ट के गिलानी के साथ थे घनिष्ठ संबंध
भट्ट पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता गिलानी के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के लिए जाने जाते थे और बार एसोसिएशन सहित लगभग 23 संगठनों को हुर्रियत की छत्रछाया में लाने में शामिल थे। इस साल की शुरुआत में हाई कोर्ट ने कादरी हत्याकांड को निर्भीक और निष्पक्ष सुनवाई के लिए श्रीनगर से जम्मू की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। जहां गवाह ऐसे माहौल में गवाही देने की स्थिति में हों जो स्वतंत्र और प्रतिकूल न हो। हाई कोर्ट का आदेश SIA की एक याचिका पर आया था। जिसमें दावा किया गया था कि श्रीनगर का कोई भी वकील कुछ प्रभावशाली अधिवक्ताओं की संलिप्तता के कारण कानूनी सहायता देने को तैयार नहीं था। कादरी की हत्या की प्रारंभिक जांच के बाद मामला एसआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था। अगस्त 2022 में पुलिस ने श्रीनगर में भट और दो अन्य वकीलों के घरों की तलाशी ली थी और डिजिटल उपकरण, बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज जब्त किए थे।

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