औद्योगिक कंपनियों से प्रदूषित पानी छोड़े जाने के कारण लाखों मछलियों की हुई मौत

कांती जाधव/मुंबई ब्यूरो। 21 नवंबर को दुनिया भर में विश्व मत्स्य पालन दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में लाखों मछुआरों के लिए भोजन और आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के अलावा, मछली विविधता झीलों, तालाबों और नदियों सहित जल निकाय के स्वास्थ्य को भी निर्धारित करती है। हालाँकि बढ़ते खतरों और प्रदूषण के कारण हर साल देश की विभिन्न नदियों और झीलों में बड़े पैमाने पर मछलियों की मृत्यु हो रही है।
पालघर तालुका में बोइसर येथिल नवापुर,दांडी येथिल दांडी तारापुर में औद्योगिक इकाइयों द्वारा रसायन युक्त दूषित पानी को बिना ट्रीट किए छोड़ने का आरोप है। इस कारण लाखों मछलियां मर गई हैं। बिना किसी प्रक्रिया करके रात में छोड़े जाने के कारण लाखों तारली मच्छि और अन्य मछलीय खाड़ी तट पर मृत पायी गईं। तारापुर औद्योगिक में रासायनिक कंपनियों के प्रदूषित पानी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मिलीभगत के चलते गुप्त रूप से छोड दिया जाता है। बोईसर दांडी नवापुर में कोली बंधुओं का मछली पकड़ने का व्यवसाय खतरे में है, और प्रदूषित पानी छोड़े जाने के कार मछली खाने से जान भी जा सकती है। दोषी व्यक्तियों और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए अधिकारियों और कंपनी मालिकों पर अपराधिक मामला भी दर्ज किया जाना चाहिए।

इस संबंध में, ग्रामीणों और मछली पकड़ने वाले संघ ने भी विरोध किया है, और तपोधन प्रतिष्ठान के दहानु के वरिष्ठ समाज सेवक हरिश्चंद्र खुलात ने भी माननीय मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। जिसमें दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। हरिश्चंद्र खुलात ने कहा कि अगर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की तो इसको लेकर जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
इस क्षेत्र में मछली की मृत्यु कोई नई बात नहीं थी क्योंकि औद्योगिक इकाइयाँ अपने अपशिष्ट उपचार संयंत्रों का संचालन नहीं करती हैं और अक्सर अनुपचारित जल को जलस्रोतों में छोड़ देते हैं। औद्योगिक अपशिष्ट जल में जैविक ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देते हैं, जिससे मछलियों और अन्य जलीय प्रजातियों के अस्तित्व के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा नहीं होती हैं।




