लखनऊ के दिगंबर जैन इंटर कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का मामला,तत्कालीन डीआईओएस उमेश कुमार त्रिपाठी पर लगे आरोप
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लखनऊ,(उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला उजागर हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ जनपद के चौक स्थित दिगंबर जैन इंटर कॉलेज में सन 2016-17 में 6 अवैध नियुक्तियां की गई थी। इस संबंध में कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी खबर प्रकाशित की गई थी। जिसके तहत स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आनंद ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए 2 सितंबर को अपर शिक्षा निदेशक सरिता तिवारी, वित्त नियंत्रक माध्यमिक शिक्षा बीआर प्रसाद, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक श्याम किशोर तिवारी के अध्यक्षता में तीन सदस्य जांच कमेटी गठित की है। संबंधित जांच कमेटी को 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह मामला करीब 6 वर्ष पहले का है उस समय तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश कुमार त्रिपाठी ने दिगंबर जैन कॉलेज में गलत ढंग से फर्जी नियुक्तियां की थी। आश्चर्य की बात यह है की फर्जी नियुक्तियों के साथ-साथ धारा तीन के तहत सभी का 3 महीने का वेतन भुगतान भी उमेश कुमार त्रिपाठी के द्वारा करा दिया गया था एवं इससे संबंधित सभी कागजात भी गायब करा दिए गए। इस कारण धारा तीन के तहत निकाले गए वेतन का ब्यौरा भी दिगंबर जैन इंटर कॉलेज के पास नहीं है। यह विवाद तब सामने आया जब आजमगढ़ में डीआईओएस के पद पर तैनात उमेश कुमार त्रिपाठी ने तत्कालीन डीआईओएस,(द्वितीय) डीएन सिंह के भाई बलवंत सिंह शिक्षक नेता हवलदार सिंह के बेटे रवि कुमार के साथ ही रिकी सिंह, रश्मि मिश्रा, शशि कला सिंह, अरुणिमा पांडे के लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपए (वेतन और कई प्रकार के एरिया इत्यादि को मिलाकर) का भुगतान करने की तैयारी शुरू कर दी है।
वर्तमान में आजमगढ़ के डीआईओएस के पद पर तैनात उमेश कुमार त्रिपाठी पर पूर्व में भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लग चुके हैं एवं हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। सन 2013 में भ्रष्टाचार एवं अनियमितता के मामले में शासन द्वारा उमेश कुमार त्रिपाठी को सस्पेंड भी किया जा चुका है। होने पर फर्जी नियुक्तियां एवं उससे संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलों को गायब करने के आरोप लग चुके हैं। राजधानी लखनऊ में अपनी भ्रष्ट कार्यशैली के लिए चर्चित उमेश कुमार त्रिपाठी को शिकायतों के बाद दूसरे जिले में ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट से इस आधार पर स्टे ले लिया था कि उनके जाने से फर्जी स्कूलों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर असर पड़ेगा। इस बीच उनके ऊपर बोर्ड परीक्षा में नकल माफियाओं के स्कूलों को सेंटर बनाने, शिक्षकों की गलत ढंग से भर्ती जैसे गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं।

शासन के निर्देश पर पहले भी चर्चित डीआईओएस उमेश त्रिपाठी के खिलाफ सतर्कता विभाग ने जांच के आदेश दिए गये थे। सतर्कत्ता विभाग की जांच में बताया गया था कि उमेश त्रिपाठी के दो पत्नियाँ हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि उमेश त्रिपाठी प्रापर्टी डीलिंग के व्यवसाय में भी लिप्त थे। यही नहीं पहले इन्होने जमीन खरीदी और फिर महंगे दामों पर बेच दी। जांच में यह भी कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। उमेश त्रिपाठी की दो पत्नियाँ हैं। अस्वनी कुमार त्रिपाठी के साथ मिलकर 30 लाख की जमींन खरीदी और फिर उसे 40 लाख में बेच दिया। उमेश त्रिपाठी के पास दो माकन है जिसमे से एक लखनऊ में और दूसरा गोरखपुर में है। नौकरी का झांसा देकर लड़कियों का शोषण करता था उमेश त्रिपाठी। निलंबन की हैट्रिक भी बना चुके हैं उमेश त्रिपाठी। इनकी आय ज्ञात स्रोत से 58 प्रतिशत अधिक है। सतर्कता आयोग ने उमेश त्रिपाठी के विरुद्ध भ्रस्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराकर कार्रवाई किये जाने की संस्तुति की थी।
अब लखनऊ के दिगंबर जैन इंटर कॉलेज मैं उनके द्वारा किए गए फर्जी नियुक्ति मामले ने एक बार फिर उनकी भ्रष्ट कार्यशैली को उजागर कर दिया है। विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि वर्तमान में डीआईओएस आजमगढ़ के पद पर तैनात उमेश कुमार त्रिपाठी ने आजमगढ़ में भी अपनी भ्रष्टाचार की जड़ें जमा रखी हैं जिसके तहत उन्होंने जनपद में कई फर्जी नियुक्तियां एवं गलत तरीके से भुगतान कर दिया है एवं कई और फर्जी नियुक्तियां एवं भुगतान करने की तैयारी कर रहे हैं। के संबंध में सरकार एवं प्रशासन को इस मामले की तत्काल गंभीरता से जांच करवा कर उमेश कुमार त्रिपाठी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए एवं उनके द्वारा की गई फर्जी नियुक्तियां भी तत्काल निरस्त कर देनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार उमेश कुमार त्रिपाठी ने कई नेता एवं मंत्रियों से सांठ-गांठ कर रखी है। जिस कारण वह अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं एवं उन पर कार्यवाही नहीं की जाती है। ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की भ्रष्ट कार्यशैली के चलते उत्तर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हो रही है एवं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के भ्रष्टाचार एवं माफियाओं के विरुद्ध चलाए गए अभियान को भी पलीता लगाया जा रहा है। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि क्या सरकार है ना भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही करने में सक्षम होगी या फिर ऐसे ही शिक्षा को व्यापार का माध्यम बनाया जाता रहेगा।




