दिल्ली के तिहाड़ जेल में बदली जिंदगी, पहले थीं मुजरिम अब कमा रहीं इज्जत की रोटी

नई दिल्ली/एजेंसी। गुनहगारों के सबसे बड़े घर जेल के सीने में दो तरह के दिल धड़कते हैं। कुछ अपराधियों के सीने में रिहा होने के बाद डॉन बनने की हूक उठती रहती है। वहीं कुछ यही सोचते हैं कि जेल से छूटने के बाद परिवार का पेट कैसे पालेंगे। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं, जो हत्या जैसे गुनाह में सजा काट रही हैं। सामाजिक जिम्मेदारी के तहत जेल प्रशासन की तरफ से ऐसी महिला कैदियों को रोजगार का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका मकसद रिहा होने पर वह काम शुरू कर इज्जत की रोटी खा सकें।
जेल नंबर 6 में महिलाओं को ऐसे दी जा रही ट्रेनिंग
तिहाड़ जेल के डीजी संजय बेनीवाल कहते हैं कि जेल से छूटने के बाद कई बार यह लोग मिलने आते हैं। जब वह आभार जताते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे वाल्मीकि का हृदय परिवर्तन हो गया है। इस समय तिहाड़ की जेल नंबर छह में कई महिला कैदियों को खादी की साड़ियां, जूट के कालीन, बैग बनाने के साथ गोबर शिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फिलहाल खादी की साड़ियां व अन्य सामान बनाने का 25 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही है। इस दौरान इनको पैसे भी दिए जाते हैं, जिससे जब यह छूटें तो उन्हें किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।
तिहाड़ जेल ने प्रतिभा मंडल न्यास, जबलपुर से करार किया है। डीजी के अनुसार ये उत्पाद हाथ से निर्मित किए जाते हैं। जेल प्रशासन के अनुसार कुछ समय पहले 25 ट्रेंड महिला कैदी रिहा होकर अपने-अपने घरों को लौट चुकी हैं और हथकरघा और हस्तशिल्प के उत्पाद तैयार कर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। छह नंबर जेल की सुपरिंटेंडेंट कृष्णा शर्मा और डिप्टी सुपरिटेंडेंट नीतू कहती हैं कि इस समय जिन महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, उनमें हत्या व ड्रग्स के मामले में बंद महिला कैदी हैं। इनमें नाइजीरियन महिला भी शामिल है। मन शांत करने के लिए इनको बागवानी, जिम, बेकार की वस्तुओं से सामान तैयार करने की तरफ डायवर्ट किया गया। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट अनीता ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद सबसे अलग-अलग बात की गई। सबका यही विचार था कि कुछ भी हो बच्चों और परिवार का पालन पोषण इज्जत के साथ करना है।
जेल नंबर-6 में हत्या के मामले में बंद एक महिला कैदी ने बताया कि मई 2023 को वह जेल आई। तब लगा अब सब कुछ खत्म हो गया है। अन्य महिला कैदी को काम करता देख उन्होंने भी काम सीखने की सोची। अब वह एक दिन में एक साड़ी बना लेती हैं। वहीं हत्या के एक अन्य मामले में बंद महिला कैदी ने बताया कि यहां काम करने के दौरान पुरानी यादें परेशान नहीं करती। समय कब निकल जाता है, पता ही नहीं चलता। बस अब बाहर निकलकर जिंदगी की नई शुरुआत करनी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button