मस्जिद पर ऊंगली उठी तो तोड़ देंगे, आंख फोड़ देंगे,मेरठ शहर के काजी का विवादित बयान

मेरठ,(उत्तर प्रदेश)। वाराणसी में लगातार तीसरे दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने सर्वे का कार्य शुरू कराया है। जिला जज डॉ. अजय कुमार विश्वेश की कोर्ट ने ज्ञानवापी के विवादित हिस्से को छोड़कर पूरे परिसर का एएसआई सर्वे कराने का आदेश दिया। एएसआई सर्वे पर रोक लगाने की मांग करते हुए हुए मुस्लिम इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां से निराशा हाथ लगी। इसके बाद सर्वे के काम में भी सहयोग शुरू कर दिया है। इस बीच विवादित बयानों का दौर शुरू हो गया है। ताजा बयान मेरठ से आया है। मेरठ के शहर काजी शफीकउर्रहमान कासमी ने मस्जिद के भीतर भड़काऊ भाषण दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों तुम्हारी गैरत क्या जवाब दे गई है? अगर इस मस्जिद की तरफ उंगली उठी तो उंगली तोड़ देंगे। कोई आंख उठाएगा तो आंख फोड़ देंगे। उनका बयान सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।
मेरठ के शहर काजी शफीकुर्रहमान कासमी ने मस्जिद में तकरीर देते हुए कहा कि मुसलमानों को को जिंदादिली के साथ रहना है। अगर बुजदिल है तो मुसलमान नहीं है। अगर मुसलमान है तो बुजदिल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि समझ गए न मेरी बात। उन्होंने आगे कहा कि जामा मस्जिद को भी मंदिर बताया जाने लगा। ऐ मुसलमानों, तुम्हारी गैरत गवारा करेगी इस बात को? शफीकुर्रहमान कासमी ने अपनी तकरीर में आगे कहा कि इस मस्जिद की तरफ उंगली उठेगी तो उंगली तोड़ देंगे। कोई आंख उठाएगा तो आंख फोड़ देंगे। शहर काजी के इस बयान को ज्ञानवापी एएसआई सर्वे और विवादित बयानों से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
हिंदू पक्ष की ओर से अपने दावे
ज्ञानवापी परिसर को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से अपने दावे किए जा रहे हैं। हिंदू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने ज्ञानवापी के सर्वे के तीसरे दिन का कार्य शुरू होने के दौरान बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में हिंदू मंदिर के प्रतीक चिह्न बिखड़े पड़े हैं। करीब 350 वर्षों से एक भ्रम की स्थिति इसको लेकर पैदा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि एएसआई सर्वे से इसकी असलियत सामने आएगी। ज्ञानवापी को लेकर लगातार राजनीति हो रही है। इससे पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि ज्ञानवापी को अगर मस्जिद कहेंगे तो विवाद होगा ही। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव 2024 से जोड़ते हुए इसे भड़काने वाली राजनीति करार दिया है।

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