सावधान ! धर्मांतरण के खिलाड़ी ऑनलाइन गेम खिलाते खिलाते आपके बच्चों को कबूल करवा रहे हैं इस्लाम

धर्मांतरण के खेल का अब इतना ज्यादा प्रसार हो चुका है कि अब यह ऑनलाइन भी खेला जा रहा है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जो मामला सामने आया है वह दर्शा रहा है कि यदि हम अब भी इस समस्या को हल्के में लेते रहे तो बाद में बहुत पछताना पड़ सकता है। जिस तरह अब बच्चों को निशाने पर लिया जा रहा है उसके प्रति अत्यधिक सचेत रहने की जरूरत है वर्ना आप उस दिन चौंक जायेंगे जब देखेंगे कि आपका बच्चा घर पर हिजाब या बुर्का पहन कर आ गया है, या इस्लामिक रीति-रिवाज मानने लगा है या फिर घर पर नमाज पढ़ने लगा है।
ऑनलाइन जिहाद कैसे चलता है?
दरअसल जैसे-जैसे हिंदू समाज में जागरूकता आ रही है और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्में लोगों की आंखें खोल रही हैं वैसे-वैसे धर्मांतरण की दुकान चलाने वालों की चिंता बढ़ती जा रही है। इसलिए अब इनका निशाना हिंदू बच्चे हैं। कोरोना काल में हर बच्चे को चूंकि ऑनलाइन पढ़ाई ही करनी थी तो जैसे-तैसे अभिभावकों ने बच्चों के लिए स्मार्टफोन का जुगाड़ कर ही दिया। अब इसी स्मार्टफोन के जरिये एक खास धर्म को सबके घरों तक पहुँचाने के लिए ‘ऑनलाइन गेम’ के माध्यम से जिहाद चलाया जा रहा है। इसके तहत पहले बच्चे को गेम की लत लगायी जाती है। लत लग जाती है और गेम में वह लेवल पर लेवल जीतता चला जाता है तो उसको हराया जाता है। यह हार बच्चे को पचती नहीं तो बताया जाता है कि कुरान की आयतें पढ़ोगे तो जीत मिलेगी। कुरान की आयतें पढ़ने पर बच्चे को योजनाबद्ध तरीके से जिताया जाता है जिससे बच्चे का इस्लाम की ओर थोड़ा-बहुत झुकाव होने लगता है। यह थोड़ा-बहुत झुकाव ही जिहाद चलाने वालों की पहली सफलता होती है। वह बच्चे को दिन में पांच बार की नमाज पढ़ने की आदत लगवाते हैं, धीरे-धीरे उनको जाकिर नाइ्क और उस जैसे कट्टरपंथियों के वीडियो भेजे जाते हैं जिससे कि बच्चा इस्लाम को अपनाने के लिए प्रेरित हो। अचानक से घर बैठा बच्चा जब नमाज पढ़ने लगता है, या हर बात में अल्लाह का शुक्रिया अदा करने लगता है तब जाकर घरवालों का माथा ठनकता है। लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है।
बहुत बड़ी चेतावनी है यह प्रकरण
देखा जाये तो गाजियाबाद से जो ऑनलाइन गेम के माध्यम से बच्चों के धर्मांतरण का मामला सामने आया है वह दर्शा रहा है कि इस जिहाद में सिर्फ साधारण मौलवी शामिल नहीं हैं क्योंकि उनके पास इतनी शिक्षा नहीं होती है कि वह ऑनलाइन गेम इत्यादि बना सकें। यानि इस जिहाद से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और आईटी क्षेत्र में काम करने वाले तमाम तकनीकी लोग जुड़ चुके हैं। यह चिंता की बात इसलिए है क्योंकि अभी तो एक गेम पकड़ा गया है, धर्मांतरण के इन खिलाड़ियों ने और क्या-क्या खेल रचे होंगे इसका अंदाजा अभी किसी को नहीं है। यह प्रकरण हमें सीख देता है कि आपके बच्चे ऑनलाइन क्या देख रहे हैं, क्या खेल रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, इस पर ध्यान दीजिए। बच्चों के फ़ोन पर कौन-कौन सी ऐप डाउनलोड हो रही हैं, उस पर नज़र रखिए। देखा जाये तो ऑनलाइन गेम के बहाने धर्मांतरण की साज़िश एक तरह का आतंकवादी हमला है। यह ऐसा आतंकवादी हमला है जिसके निशाने पर छोटे छोटे बच्चे हैं।
मामला क्या है?
जहां तक इस पूरे प्रकरण की बात है तो आपको बता दें कि गाजियाबाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम (धर्मांतरण विरोधी कानून) के तहत प्राथमिकी दर्ज किये जाने के कुछ दिनों बाद एक मौलवी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, मौलवी पर एक नाबालिग हिंदू लड़के को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने एक लोकप्रिय ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर उक्त लड़के से संपर्क किया और उसे इस्लाम अपनाने के लिए बहलाया-फुसलाया। बताया जा रहा है कि आरोपी मौलवी ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह भोले-भाले नाबालिगों को विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के पुराने वीडियो दिखाता था। इस मामले में अभी एक आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस को इन लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपए के संदिग्ध लेन-देन की सूचना भी मिली है जिसकी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। वैसे हम आपको यह भी बता दें कि शुरुआत में यह मामला जहां चार-पांच नाबालिगों के धर्मांतरण का लग रहा था उसके संदर्भ में अब बताया जा रहा है कि यह संख्या 300-400 भी हो सकती है।
प्रतिक्रियाएं
इस मामले में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पीआईएल मैन के रूप में विख्यात अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि निंदा करने, पुतला फूंकने, रैली निकालने, तू-तू-मैं-मैं करने, नूरा-कुश्ती करने, फोटो शेयर करने, सड़क जाम करने, कैंडिल मार्च करने, ट्विटर ट्रेंडिंग करने, फेसबुक पर लिखने, मीडिया डिबेट करने, फांसी की मांग करने और आर्थिक सहायता देने से धर्मांतरण नहीं रुकेगा। उनका कहना है कि इसके लिए एक सख्त कानून बनाने की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर अयोध्या स्थित प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत श्री राजू दास का कहना है कि यह सारा प्रकरण दिखाता है कि कैसे एक बड़ी साजिश रची जा रही है।

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