तिहाड़ जेल में जंगलराज: टिल्लू की हत्या में पुलिस की मिलीभगत

  • कम से कम आठ हट्टे-कट्टे पुलिसवाले टिल्‍लू पर हमले को देखते रहे
  • अधमरे टिल्‍लू ताजपुरिया की पुलिसवालों के सामने की गई हत्‍या
  • लहूलुहान टिल्‍लू को लात-घूंसों और सुआ से गोद-गोदकर मारा गया

दिल्‍ली ब्यूरो। तिहाड़ जेल में गैंगस्‍टर टिल्‍लू ताजपुरिया की हत्‍या का एक और खौफनाक सीवीटीवी फुटेज सामने आया है। यह वीडियो तिहाड़ में पुलिस के निकम्‍मेपन का जीता-जागता सबूत है। तिहाड़ को दिल्‍ली की सबसे सुरक्षित जेल माना जाता है। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि और जेलों में हालात क्‍या होंगे। यह सही है कि टिल्‍लू ताजपुरिया शराफत का पुतला नहीं था। लेकिन, कुछ गुर्गे जेल के अंदर सुआ से उसकी गोद-गोदकर हत्‍या कर दें ये कहां से सही है। पहले वीडियो में कुछ दरिंदों को टिल्‍लू की पैने हथियार से हत्‍या करते देखा गया है। हालांकि, दूसरा वीडियो तो जेल की व्‍यवस्‍था से ही भरोसा उठा देता है। लहूलुहान अधमरे टिल्‍लू ताजपुरिया को पुलिसवालों के सामने गैंगस्‍टर दीपक तीतर और उसके साथी बेरहमी से लातें मारते हैं। सुआ से गोदते हैं। इस दौरान पुलिस की पूरी फौज तमाशबीन बनी खड़ी रहती है। उसे बचाने के कोई गंभीर प्रयास नहीं दिखते हैं। जेल में धड़ल्‍ले से दीपक घूम रहा है। पुलिसवालों की फौज ‘लाड़-प्‍यार’ से दरिंदों को हटाते हुए दिख रही है।

टिल्‍लू ताजपुरिया की हत्‍या के सामने आए वीडियो दिल दहलाने वाले हैं। गैंगस्‍टर की जेल में हत्‍या का एक और वीडियो सामने आया है। इसमें दिखता है कि कुछ पुलिसवाले खून से लथपथ टिल्‍लू को तिहाड़ के अंदर एक चादर पर डालकर घसीटते हुए लाते हैं। यह वीडियो फुटेज 2 मई का बताया जाता है। दूसरी तरफ से एक और सेल से लाल रंग की स्‍पोर्ट्स निक्‍कर पहनकर दीपक तीतर बाहर निकल आता है। अपने गुर्गों के साथ वह टिल्‍लू को लातों से मारता है। फिर बेसुध पड़े टिल्‍लू पर सुआ से गोद-गोदकर हमले करता है। इस दौरान कम से कम 8 पुलिस वाले बस हटाने के हल्‍के-फुल्‍के प्रयास ही करते दिखते हैं। मानों उनके पास न कोई हथियार थे न हौसला। कुछ तो तीतर को हमला करते वक्‍त पीछे हटते भी देखे जा सकते हैं। ये अधमरे टिल्‍लू से ज्‍यादा घबराए नजर आते हैं।

पहले वीडियो में तीतर और उसके साथी टिल्‍लू को बेरहमी से सुआ गोद-गोदकर मारते हुए दिखते हैं। ताजा वीडियो उसके बाद का है। तिहाड़ जेल की इन तस्‍वीरों को देखकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं। जेल के अंदर सुरक्षा से भरोसा उठ जाता है। ये तस्‍वीरें पुलिस के निठल्‍लेपन को दिखाती हैं। यह उस जेल का हाल है जिसे दिल्‍ली में सबसे सुरक्षित माना जाता है। जिसके बारे में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन, वीडियो और तस्‍वीरें देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि देश की दूसरी जेलों में क्‍या हाल होगा। अगर पुलिस तमाशबीन बनी रहने के लिए है तो इसका काम ही क्‍या है। 8 हट्टे-कट्टे हथियारों से लैस पुलिसवाले वाले जब खूंखार बदमाशों से घबरा रहे हैं तो जरा आम आदमी की सोचिए। वे इनके खिलाफ भला क्‍या सिर उठा पाएंगे। ऐसे खूंखार अपराधियों को रोटियां तुड़वाने का क्‍या तुक है।
कैसे जेल में अपराध‍ियों की ऐश?
जेल में एक सेल से दूसरी सेल में खुल्‍लम खुल्‍ला घूम रहे ऐसे दरिंदों पर अंकुश लगाने के लिए क्‍यों कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। टी-शर्ट और स्‍पोर्ट्स निक्‍कर में ये ऐसे दिख रहे हैं जैसे ओलिंपिक की प्रैक्टिस करने के लिए जा रहे हों। ये सारी ऐश इन्‍हें जेल के अंदर कैसे मिल रही है। पुलिसवालों की मिलीभगत के बगैर ऐसा कतई नहीं हो सकता है। असल गुनहगार ये दरिंदे नहीं बल्कि वे पु‍लिसवाले हैं जो अपनी ड्यूटी से ज्‍यादा इन गुंडों की खिदमतदारी में लगे हैं।

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