रेलवे की आंखों में झोंकी धूल, चांदी की जगह तांबे के मेडल सप्लाई, इंदौर की कंपनी पर एफआईआर दर्ज

लखनऊ/उत्तर प्रदेश। राजधानी लखनऊ में रेलवे विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। सम्मान समारोह के लिए मंगवाए गए गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल चांदी के बजाय तांबे के निकल गए। इसका खुलासा होने के बाद अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए हैं। यह धोखाधड़ी इंदौर की एक निजी कंपनी द्वारा की गई है। इसके खिलाफ लखनऊ के आलमबाग थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
दरअसल रेलवे विभाग की ओर से इंदौर स्थित M/s वायबल डायमंड्स को 853 गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल सप्लाई करने का ऑर्डर दिया था। इनमें से 553 मेडल अप्रैल 2025 में आलमबाग स्थित सामान्य भंडार डिपो में पहुंचे थे। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय लैब में जब इसकी जांच कराई गई तब बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में मेडल फेल हो गए थे। रिपोर्ट में सामने आया कि मेडल में 99.9% चांदी की जगह केवल 0.01–0.02% चांदी पाई गई और वे वास्तव में तांबे से बने थे।इससे साफ हो गया कि कंपनी ने जानबूझकर नकली मेडल सप्लाई किए हैं। इस मामले का खुलासा होने के बाद आलमबाग थाने में तहरीर दी गई थी। शिकायत में कंपनी के मालिक विपुल जैन और जांच एजेंसी TUV इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। रेलवे ने इस मामले को सिर्फ गुणवत्ता की कमी नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक साजिश करार दिया है।
आलमबाग एसओ ने बताया कि विभाग का इंदौर की कंपनी से एग्रीमेंट था। रिटायर होने वाले अधिकारियों को मेडल दिया जाता है। उस मेडल के लिए आर्डर दिया था। इसमें 99 प्रतिशत सिल्वर होना चाहिए। लेकिन इसमें 1 प्रतिशत की सिल्वर निकला है, बाकी सब नकली निकला है। इसी मामले में इंदौर की कंपनी के खिलाफ मुकदमा लिखा गया है। इसमे धारा 419-20 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच में पुलिस जुट गई है। फिलहाल इस खुलासे के बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

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