घूस देते-देते थका तो जान देकर मुक्त हुआ शिक्षक

गुना,(मध्य प्रदेश)। एमपी के गुना जिले से खबर आई है कि एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने स्कूल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यूं तो ये कोई खास खबर नहीं है। लोग आत्महत्या करते ही रहते हैं। एक शिक्षक भी उनमें शामिल हो गया तो कौन से बड़ी बात हो गई। लेकिन बड़ी बात है। बात यह है कि देश के नौनिहालों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी निभा रहा यह युवा शिक्षक रोज-रोज की घूसखोरी के आगे विवश हो गया। अपने ऊपर वालों को पैसे नहीं दे पाया तो जान देकर हिसाब कर गया।
42 साल के धर्मेंद्र सोनी गुना जिले की सिमरोद पंचायत के गमरिया का डेरा गांव के सरकारी स्कूल में तैनात थे। वे सालों से अकेले ही इस स्कूल की हर व्यवस्था संभाल रहे थे। जिसमें बच्चों को पढ़ाने से लेकर उनके खाने पीने और बड़े अफसरों की आवभगत भी शामिल थी। उन्होंने मंगलवार 18 अप्रैल को दोपहर में स्कूल में ही फांसी लगाकर जान दे दी। बताया यह भी गया है कि अभी कुछ दिन पहले सरकार ने उनके साथ एक और शिक्षक को नियुक्त किया था। वह शिक्षक इन दिनों अवकाश पर था। वह गुना शहर में रहते थे और रोज स्कूल आते जाते थे। गांव वालों ने स्कूल में सोनी को लटके देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। बुधवार को सोनी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इस आत्महत्या का सबसे अहम पहलू यह है कि युवा शिक्षक ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की रोज-रोज की प्रताड़ना और पैसा वसूली की वजह से जान दी। इस संबंध में उसने मरने से पहले पूरा विवरण एक पत्र में दर्ज किया। फिर फांसी पर लटक गया। यह पत्र फिलहाल पुलिस के पास बताया गया है। इस पत्र में धर्मेंद्र सोनी ने जो कुछ लिखा है, वह प्रदेश के हालात का वह प्रमाण है, जिसकी कल्पना शिक्षा विभाग में नहीं की जा सकती।
सोनी ने अपने विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नाम बताते हुए लिखा है कि किस तरह उन्हें वे दोनों ब्लैकमेल कर रहे थे। कैसे उन्हें छोटी-छोटी बातों को लेकर प्रताड़ित किया जाता था। किस तरह उनसे नियमित वसूली ये दोनो अधिकारी करते थे। जानकारी के मुताबिक धर्मेंद्र सोनी ने मौत का फंदा पहनने से पहले अपना पूरा दर्द कागज पर उतार दिया था। प्रदेश सरकार की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के अंदर फैल चुके कोढ़ का दस्तावेजी प्रमाण है। सरकारी व्यवस्था के मुताबिक धर्मेंद्र की आत्महत्या की जांच की जा रही है। उन दोनों अफसरों को हटा दिया गया है, जिनके नाम सुसाइड नोट में धर्मेंद्र लिख गए हैं। आगे क्या होगा… पुलिस जाने! दस साल से अकेले स्कूल को संभाल रहे धर्मेंद्र सोनी तो खुद की बलि देकर मुक्त हो गए। अभी तक आपने सरकार के तमाम विभागों में भ्रष्टाचार के बारे में सुना होगा।




