अब उर्दू-फारसी में लिखी FIR तो दिल्ली पुलिसवालों पर हो जाएगा एक्शन!

नई दिल्ली। दिल्ली में दर्ज होने वाली एफआईआर में अब उर्दू और फारसी शब्दों का इस्तेमाल करने वाले पुलिसवालों पर एक्शन लिया जाएगा। पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने 11 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि निर्देश का पालन नहीं करने को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी पर उचित अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाएगा। कमिश्नर के इस सर्कुलर में 383 उर्दू-फारसी के शब्द दिए गए हैं, जिनका अनुवाद हिंदी और अंग्रेजी में दिया गया है। यानी एफआईआर में अब उर्दू-फारसी की जगह ये शब्द लेंगे।

ब्रिटिशकाल से चले आ रहे उर्दू-फारसी के शब्दों का इस्तेमाल दिल्ली पुलिस एफआईआर में करती रही है। इन पर आपत्ति जताते हुए 2018 में हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका डाली गई। विशालाक्षी बनाम भारत सरकार के इस मामले में हाई कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए कहा था कि एफआईआर शिकायतकर्ता के शब्दों में होनी चाहिए। बहुत अधिक जटिल भाषा, जिसका अर्थ खोजने के लिए शब्दकोशों का इस्तेमाल करना पड़े, उनका एफआईआर में इस्तेमाल नहीं किया जाए। पुलिस अधिकारी आम जनता के लिए काम कर रहे हैं, न कि उर्दू या फारसी में डॉक्टरेट की पदवीधारी लोगों के लिए। इसलिए जहां तक संभव हो, एफआईआर में सरल शब्दों का प्रयोग होना चाहिए।

उर्दू-फारसी शब्दों की जगह हिंदी और अंग्रेजी शब्दों की सूची के साथ एक सर्कुलर 20 नवंबर 2019 को भी जारी किया गया था। दिल्ली पुलिस के लीगल सेल के तत्कालीन डीसीपी राजेश देव ने इसे भेजा था। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि इस निर्देश का अनुपालन संतोषजनक नहीं है। एफआईआर के अलावा, डेली डायरी और चार्जशीट तक में उर्दू-फारसी शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी निगरानी एसएचओ ही नहीं, बल्कि जिला पुलिस अफसरों को भी करनी चाहिए। इसलिए सभी थानों के एसएचओ, जांच अधिकारी और ड्यूटी ऑफिसर को जागरूक किया जाए कि वे एफआईआर, डायरी और चार्जशीट में आसान शब्दों का प्रयोग करें, जिसे शिकायतकर्ता आसानी से समझ सके।

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