मासूम से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की जेल, प्रदेश में पहली बार नाबालिग के बालिग होने पर फैसला

गौतमबुद्ध नगर। अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश पाक्सो द्वितीय चंद्र मोहन श्रीवास्तव ने तीन वर्ष की मासूम से डिजिटल रेप करने के दोषी को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। वारदात के वक्त आरोपी नाबालिग था। बालिग होने पर गंभीर अपराध की श्रेणी में मामला आने पर जुवेनाइल कोर्ट से केस को सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया।
जघन्य अपराध के लिए नाबालिग को बालिग होने पर सजा सुनाने का पूरे प्रदेश में पहला मामला है। सजा सुनाए जाने पर आरोपी 12वीं का छात्र सागर घुटनों के बल पर बैठ कर रोने लगा। विशेष लोक अभियोजक जेपी भाटी ने बताया कि वर्ष 2020 में दादरी कोतवाली क्षेत्र में 3 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म का मामला 16 वर्ष के नाबालिग पर दर्ज किया गया था।
पीड़ित परिजन के मुताबिक बच्ची पड़ोस में एक युवती से पढ़ने गई थी। युवती ने किसी कार्य में व्यस्त होने की बात कहकर सागर को बच्ची को बच्ची को पढ़ाने के लिए कह दिया गया।बच्ची को पढ़ने के लिए ले जाकर सागर ने उसके साथ डिजिटल दुष्कर्म किया। उस वक्त उसकी उम्र 16 वर्ष 2 माह थी। पुलिस ने दुष्कर्म के मामले में जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया।
जुवेनाइल कोर्ट ने उसे बाल सुधार गृह भेज दिया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि गंभीर श्रेणी का अपराध होने पर जुवेनाइल कोर्ट ने सागर के बालिग होने पर मामला अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश पाक्सो द्वितीय चंद्र मोहन श्रीवास्तव की अदालत में स्थानांतरित कर दिया।




