बलिदानी कैप्टन सुनील पर होगा कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम
18 साल पहले आतंकियों से लोहा लेते समय हुए थे शहीद

कठुआ/जम्मू। रेलवे स्टेशन कठुआ अब बलिदानी कैप्टन सुनील चौधरी के नाम से जाना जाएगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर सामान्य प्रशासनिक विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बलिदानी कैप्टन सुनील चौधरी कठुआ रेलवे स्टेशन होगा। स्थानीय लोग और स्वजन लंबे समय से स्टेशन का नाम बदलने की मांग कर रहे थे।
लोग चाहते थे कि जिस तरह ऊधमपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बलिदानी कैप्टन तुषार महाजन के नाम पर रखा गया, उसी तरह कठुआ का नाम भी सुनील चौधरी के नाम पर रखा जाए, ताकि जब भी कोई जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करे तो उसकी जुबान पर बलिदानी सुनील चौधरी का नाम हो। अब सरकार ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। सुनील के पिता सेवानिवृत्त कर्नल पीएल चौधरी का कहना है कि वे उपराज्यपाल समेत उन तमाम लोगों के आभारी हैं, जिन्होंने उनके बेटे का नाम कठुआ के प्रवेश द्वार से जोड़ा है। यह जानकर सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
वह चाहते हैं कि देश के लिए कुर्बानी देने वाले हर एक वीर जवान को ऐसा सम्मान मिले, जिससे युवा वर्ग प्रेरित हो और देश के लिए मर-मिटने का जज्बा पैदा हो। उन्होंने कहा कि बेटे के बलिदान पर पहले से गर्व था। आज यह गर्व और बढ़ गया है। न सिर्फ उनका, बल्कि कठुआ शहर के लोगों को भी इस पर नाज रहेगा। कैप्टन सुनील चौधरी का जन्म 22 जून 1980 को कठुआ के पास गोविंदसर गांव में सैन्य परिवार में हुआ था। वे तीन भाइयों में सबसे बड़े और लेफ्टिनेंट कर्नल पीएल चौधरी और सत्या चौधरी के बेटे थे। सुनील के पिता स्वयं सेवानिवृत्त कर्नल हैं। एक भाई अंकुर चौधरी वायुसेना में विंग कमांडर हैं। सुनील चौधरी ने एमबीए पढ़ाई पूरा करने से पहले ही सेना में की
शामिल होने का निर्णय किया। उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा पास की और एक जुलाई 2003 को इंडियन मिलिट्री एकेडमी में प्रवेश लिया। उन्हें 10 दिसंबर 2004 को 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट की 7/11 गोरखा राइफल्स बटालियन में कमीशन मिला। उनकी पहली पोस्टिंग कोलकाता के फोर्ट विलियम में 7/11 गोरखा राइफल्स में हुई। 26 जनवरी 2008 को कैप्टन सुनील कुमार चौधरी को असम के तिनसुकिया जिले के नाओपाथर गांव में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम के आतंकियों के खिलाफ अभियान के दौरान उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। अगले ही दिन 27 जनवरी 2008 को कैप्टन सुनील को 19 पंजाब के लेफ्टिनेंट वरुण राठौर के साथ कमांडिंग ऑफिसर कर्नल प्रमित सक्सेना द्वारा आयोजित समारोह के लंच में शामिल होना था।
इसी दौरान उन्हें आतंकियों के बारे सूचना मिली और वह लेफ्टिनेंट राठौर व पांच जवानों के साथ आतंकियों का खात्मा करने चले गए। इसी में वे बलिदान हो गए। ऑपरेशन में जाने से पहले कैप्टन सुनील ने अपनी मंगेतर से बात की थी।




