रतलाम में जया किशोरी ने सनातन धर्म को लेकर कही बड़ी बात, कथा में उमड़े श्रद्धालु

रतलाम,(मध्य प्रदेश) प्रसिद्ध कथा वाचिका जया किशोरी इन दिनों रतलाम के कनेरी गांव में भागवत कथा कर रही हैं। उनकी कथा में रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा और सुरीले भजनों के बीच जया किशोरी ने सनातन धर्म को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि सनातन धर्म आंख पर पट्टी बांधना नहीं सिखाता।कनेरी की कथा में जया किशोरी ने कहा कि सनातन धर्म कभी नहीं कहता कि आप आंखों पर पट्टी बांधकर रहें। हर बात पर आंखें मूंदकर भरोसा करने की सीख सनातन धर्म नहीं देता। सुनी हुई बातों पर चिंतन करना चाहिए।

जया किशोरी ने कहा कि सवाल करने से ज्ञान बढ़ता है, लेकिन प्रश्नों में मर्यादा होनी चाहिए। उन्होंने गीता उपदेश के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण उपदेश दे रहे थे, तब अर्जुन उनसे बार-बार सवाल पूछ रहे थे। श्रीकृष्ण उनके हर सवाल का जवाब दे रहे थे क्योंकि अर्जुन के प्रश्नों में मर्यादा थी। जया किशोरी ने इस दौरान दोस्ती की परिभाषा भी बताई। उन्होंने कहा कि दोस्त वो नहीं होता जो हर गलत-सही काम में हमारा साथ दे। अच्छे दोस्त गलत में साथ नहीं देते। गलत काम से रोकने वाला ही अच्छा दोस्त होता है। कथा के दौरान जया किशोरी ने कहा कि कोविड 19 के संक्रमण ने दुनिया के लिए अथाह मुश्किलें पैदा की, लेकिन प्रकृति के लिए यह समय अच्छा था। कोई भीड़ नहीं थी, शोरगुल नहीं था और गंदगी नहीं थी। इससे प्रकृति भी साफ हो गई।

उन्होंने कथा के प्रसंग के दौरान सकारात्मक सोच का महत्व भी बताया। जया किशोरी ने कहा कि नकारात्मक विचार जीवन में निराशा का भाव पैदा करते हैं। इसलिए परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, सोच हमेशा सकारात्मक रखनी चाहिए। जया किशोरी की कथा में रोज हजारों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पंडाल में कहीं पैर रखने की जगह नहीं होती। प्रसंगों के दौरान उनके भजनों को सुनकर लोग भक्ति में लीन नजर आते हैं। 12 अप्रैल से शुरू हुई भागवत कथा के पहले दिन जया किशोरी का अलग अंदाज दिखा। वे बुलेट और कारों के काफिले के साथ कथा स्थल पर पहुंचीं। कथा की शुरुआत से पहले कलश यात्रा निकाली गई।

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