ना एफआईआर, ना बयानों में था केदार सिंह का नाम! आगरा पुलिस की कस्‍टडी में मौत पर उठ रहे सवाल

Neither in the FIR nor in the statements was Kedar Singh's name mentioned! Questions being raised on his death in the custody of Agra Police

आगरा/उत्तर प्रदेश। पुलिस कस्टडी में केदार सिंह की मौत से आगरा पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस केस में पुलिस ने केदार सिंह को उठाया था वह 13 महीने पुराना था। केदार सिंह का नाम ना तो एफआईआर में था ना ही वादी ने अपने बयानों में उसका जिक्र किया था। फिर पुलिस उसके घर जीप लेकर क्यों पहुंची थी? केदार को किस लिए टॉर्चर किया गया जिससे उसका हार्ट फेल हो गया।डौकी के गांव घड़ी हैसिया के रहने वाले केदार सिंह (52) एक आटा चक्की चलाते हैं। गुरुवार दोपहर कबीस चौकी की पुलिस जीप लेकर उनके पास पहुंची। केदार सिंह को जीप में बैठा लिया। पुलिस उसे थाने ले जाने की जगह चौकी पर ले गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जीप में बैठाते ही उनकी पिटाई लगानी शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें चौकी ले जाकर थर्ड डिग्री दी गई जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें एसएन मेडिकल कालेज ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
26 नवंबर, 2023 में ग्राम प्रधान शीला देवी समेत 8 लोगों पर धोखाधड़ी करने का केस थाना डौकी में दर्ज हुआ था। वादी अशोक ने आरोप लगाया था कि खेत के फर्जी कागज तैयार कर उस पर 7 लाख रुपये का लोन लिया गया था। इस मामले को 13 महीने पूरे हो गए। पुलिस ने ना तो आज तक किसी को गिरफ्तार किया है और ना ही इस मामले में चार्जशीट लगाई है। जबकि वादी अशोक का कहना है कि उन्होंने ना तो एफआईआर और ना ही अपने बयानों में केदार सिंह का नाम लिया है।
पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड़ ने नए वर्ष की शुरुआत होते ही शिष्टाचार नीति से काम करने की गाइडलाइन जारी की थी। थानों में आने वाले फरियादियों से आप कहकर बात करना, चाय और बिस्किट सर्व करना आदि। मगर अभी एक माह भी पूरा नहीं हुआ कि पुलिस की कारगुजारियों की पोल खुल गई। बिना किसी गवाह और आरोप के पुलिस ने केदार सिंह को ऐसी यातनाएं दीं कि उसने दम तोड़ दिया।
हालांकि ये पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी साल 2018 में राजू गुप्ता को थाना सिकंदरा पुलिस ने यातनाएं दे-देकर मार डाला था। इसके बाद थाना जगदीशपुरा में सफाई कर्मचारी अरुण को चोरी के शक में इतना पीटा गया कि पुलिस कस्टडी में उसकी मौत हो गई। जबकि साल 2024 में फिरोजाबाद को जेल में यातनाएं देकर मार डाला गया था।

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