जस्टिन ट्रूडो की पार्टी को आई हिंदुओं की याद, चुनाव आया तो भागे-भागे मंदिर पहुंचे पीएम

पूरे कार्यकाल में रहे खालिस्तानियों के हमदर्द, कनाडा में 28 अप्रैल को संसदीय चुनाव

टोरंटो/एजेंसी। कनाडा में इस महीने संसदीय चुनाव होने वाले हैं और अब राजनीतिक पार्टियों को हिंदू याद आने लगे हैं। जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी, जिसने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान मंदिरों पर होने वाले हमलों पर चुप्पी बनाए रखी, खालिस्तानियों को उत्पात मचाने दिया और भारत विरोधी तत्वों को बढ़ावा दिया, उसे अचानक मंदिरों पर प्रेम उमड़ पड़ा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चुनाव से पहले भागे भागे मंदिर पहुंचे हैं। वो मंदिरों में जाकर हिंदू वोट हासिल करने के लिए प्रचार कर रहे हैं। शनिवार को टोरंटो में BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर में रामनवमी के त्यौहार के अवसर पर पहुंचे थे। जबकि पिछले कुछ सालों में स्वामीनारायण मंदिरों पर दर्जनों हमले किए गये और लिबरल पार्टी ने खालिस्तानियों के वोट के लिए चुप्पी साधे रखी।प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का मंदिर में इंडो-कैनेडियन कैबिनेट मंत्री अनीता आनंद ने स्वागत किया, जिन्होंने बाद में एक्स पर लिखा, “भगवान राम के जन्म का जश्न मनाने के लिए स्वामीनारायण मंदिर में पहली बार आने वाले मार्क कार्नी का स्वागत करते हुए बहुत खुशी हुई। रामनवमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!” उनके साथ, ग्रेटर टोरंटो एरिया के लिबरल पार्टी के सांसद भी मंदिर में मौजूद थे।
कनाडा में 28 अप्रैल को इलेक्शन होने हैं और लिबरल पार्टी काफी पीछे चल रही है। वहीं कनाडा में करीब 6 लाख हिंदू मतदाता हैं और कम से कम 30 सीटों पर वो हार-जीत का फैसला कर सकते हैं। कनाडाई हिंदू मतदात जीटीए, मेट्रो वैंकूवर जैसे क्षेत्रों और यहां तक कि अल्बर्टा में कैलगरी और एडमॉन्टन जैसे शहरों में महत्वपूर्ण मतदान ब्लॉक बनाते हैं। खासकर अगर चुनाव काफी तगड़ा होने वाला हो और एक एक वोट काफी अहमियत रखता हो, तो हिंदुओं का मत काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लिबरल पार्टी ने पिछले कुछ हफ्तों में हिंदुओं को खुश करने की काफी कोशिशों की हैं, लेकिन हिंदू मतदाताओं का सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के साथ तनाव बना हुआ है। उदाहरण के लिए, खालिस्तानी चरमपंथ पर पार्टी के नरम रुख ने हिंदुओं के बीच डर पैदा कर दिया है। माना जा रहा है कि लिबरल पार्टी को हिंदुओं की नाराजगी काफी भारी पड़ सकती है।
इसके अलावा पिछले महीने लिबरल पार्टी ने हिंदू सांसद चंद्र आर्य की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी, जिससे हिंदुओं का गुस्सा और बढ़ गया है और पार्टी की काफी आलोचना की गई है। चंद्र आर्य ने लगातार हिंदू मंदिरों पर होने वाले हमलों को लेकर पार्टी के रूख और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की आलोचना की थी। उन्होंने लगातार खालिस्तानियों के खिलाफ अपनी नाराजगी का इजहार किया था, जिसके बाद खालिस्तानियों ने उन्हें निशाना भी बनाने की कोशिश की थी। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका स्थित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून ने ट्रूडो से चंद्र आर्य के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया था।
कनाडा में मंदिरों पर हमलों को लेकर चुप्पी
कनाडा में पिछले कुछ सालों में मंदिरों पर हमलों की वारदातें काफी बढ़ गई हैं। पिछले हफ्ते भी हैल्टन क्षेत्रीय पुलिस सर्विस ने ग्रेटर टोरंटो एरिया में श्री कृष्ण वृंदावन मंदिर में तोड़फोड़ करने के मामले में दो संदिग्ध लोगों की तलाश शुरू की है। सीसीटीवी फुटेज में दो लोगों को मंदिर की ओर जाते हुए और प्रवेश द्वार पर लगे साइनबोर्ड को फाड़ते और नुकसान पहुंचाते हुए देखा गया है। सितंबर 2023 में, भारत में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस ने हिंदुओं से कनाडा छोड़कर भारत जाने की धमकी दी थी। कनाडा में हिंदुओं की आबादी करीब 10 लाख है, जिनमें से करीब 6 लाख वोटर्स हैं। इसके अलावा कनाडाई हिंदुओं ने एक खास पैटर्न पर वोट करने का फैसला किया है। वो इस बार ऐसे उम्मीदवारों के खिलाफ वोट करने वाले हैं, जो खालिस्तान समर्थक हैं, चाहे वो किसी भी पार्टी से क्यों ना जुड़े हों।

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