सात साल जेल में रहे, अब कर रहे अपराधियों का सफाया राजस्थान के ‘दबंग’ आईपीएस
कभी सात साल तक जेल में रहने वाले यह अफसर आज एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के मुखिया हैं और राजस्थान के अपराधियों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुके हैं। इनके कमान संभालने के बाद राजस्थान पुलि के 'हाथ' इटली और दुबई तक पहुंच गए हैं।

जयपुर/एजेंसी। राजस्थान कैडर के सीनियर आईपीएस दिनेश एमएन की छवि पुलिस महकमे में अलग ही है। उनकी छवि एक दबंग अफसर की रही है। जब वे प्रोबेशन पर थे, तब से ही चर्चा में आ गए थे। जयपुर के गांधीनगर सर्किल में पदस्थ रहने के दौरान उन्होंने उन नेताओं को पीटकर जेल में बंद कर दिया, जो छात्र राजनीति की आड़ में गुंडागर्दी करते थे। इसके बाद जब वे एसपी बने तो डकैतों और खनन माफियाओं के पीछे पड़ गए। कई एनकाउंटर भी किए। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में आईपीएस दिनेश एमएम को जेल जाना पड़ा। वे सात साल तक जेल में रहे और वर्ष 2014 में जमानत पर छूटे। साल 2017 में दिनेश एमएन सहित सभी पुलिस अफसरों को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में कोर्ट ने बरी कर दिया था।
जेल से छूटकर वापस पुलिस सेवा में आने के बाद सालभर के लिए वे एसीबी में आईजी रहे। बाद में कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को पकड़ने के लिए दिनेश एमएन को एसओजी में लगाया गया। एसओजी के आईजी रहते सीनियर आईपीएस दिनेश एमएन की टीम ने पहले गैंगस्टर आनंदपाल के सभी गुर्गों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाला। जून 2017 में आनंदपाल का भाई एसओजी के हत्थे चढ़ गया और फिर आनंदपाल के छिपने का ठिकाने का भी पता चल गया। एसओजी ने आनंदपाल सिंह के ठिकाने को घेर लिया और सरेंडर करने की अपील की। इस दौरान आनंदपाल सिंह की ओर से पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। पुलिस की जवाबी फायरिंग में आनंदपाल ढेर हो गया। हालांकि आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर पर सवाल उठे। आनंदपाल के परिजनों ने इस एनकाउंटर को फेक बताया। पिछले दिनों राजस्थान हाईकोर्ट ने भी एनकाउंटर करने वाली टीम के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
करीब दो साल तक एसओजी में आईजी रहने के बाद तत्कालीन सरकार ने उन्हें एक बार फिर एसीबी में लगाया। इस बार उनके काम में और तेजी आई। उन्होंने राजस्थान के भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ गिरफ्तारी का अभियान छेड़ दिया। सौ से ज्यादा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। दिनेश एमएन के नेतृत्व में राजस्थान में पहली बार किसी आईएएस अफसर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। तत्कालीन आईएएस अशोक सिंघवी को 2.5 करोड़ रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया था।
दिसंबर 2023 में जब प्रदेश में भजनलाल शर्मा की सरकार बनी। तब एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स का गठन किया गया। इस एजीटीएफ का प्रभारी दबंग आईपीएस दिनेश एमएन को बनाया। एडीजी क्राइम होने के साथ वे एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की भी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। एजीटीएफ ने पिछले डेढ़ साल में डेढ़ सौ ज्यादा खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे डाला। गिरफ्तार किए गए बदमाशों में एक लाख रुपये का इनामी सुमित मांजू, 50 हजार का इनामी कुलदीप जघीना हत्याकांड का आरोपी सचिन जाट भी शामिल है। दिनेश एमएन की टीम ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के 50 से ज्यादा गुर्गों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। लॉरेंस के गुर्गे अलग अलग देशों में छिपे हुए हैं।
आईपीएस दिनेश एमएन के नेतृत्व में एंटी गैंगस्टर टास्ट फोर्स की टीम विदेश में छिपे अपराधियों पर भी नजर बनाए हुए है। पिछले दिनों राजस्थान पुलिस ने ईटली में छिपे गुर्गे अमरजीत सिंह बिश्नोई को ट्रेस किया और इटली पुलिस से गिरफ्तार करवाया। अमरजीत की पत्नी सुधा कंवर को भी राजस्थान पुलिस की सूचना पर इटली में गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि उन दोनों को अभी तक भारत नहीं लाया जा सका। अप्रैल 2025 में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने दुबई में छिपे आदित्य जैन उर्फ टोनी को गिरफ्तार करवाया था। टोनी भी लॉरेंस गैंग का गुर्गा है। आदित्य उर्फ टोनी की गिरफ्तारी के बाद राजस्थान पुलिस की एक टीम दुबई गई और उसे भारत लेकर आई। ऐसे कई मामले हैं जिनमें आईपीएस दिनेश एमएन के नेतृत्व की वजह से राजस्थान पुलिस का गौरव बढ़ा है।




