डिजिटल अरेस्ट रैकेट का ताइवान लिंक, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों में रेड के बाद मिला कनेक्शन
Taiwan link of digital arrest racket, connection found after raids in many states including Delhi, Gujarat, Rajasthan

अहमदाबाद/एजेंसी। साइबर क्राइम ब्रांच अहमदाबाद ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें चार ताइवान के नागरिक भी शामिल हैं। यह गिरोह लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगता था। पुलिस के मुताबिक, ये अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और फिर उनसे मोटी रकम ऐंठ लेते थे।यह घटना तब सामने आई जब एक बुजुर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ लोग खुद को ट्राई, सीबीआई और साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताकर उन्हें डरा रहे थे। ये अपराधी उन पर आरोप लगा रहे थे कि उनके बैंक अकाउंट से अवैध लेनदेन हो रहा है। डर के मारे उन्होंने अपराधियों के कहने पर 79.34 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने बताया कि गिरोह पीड़ितों को ‘डिजिटली अरेस्ट’ कर लेता था। वे वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ितों पर नज़र रखते थे और उन्हें डरा धमकाकर पैसों की मांग करते थे। पुलिस कमिश्नर शरद सिंघल ने बताया, ‘पीड़ित बुजुर्ग ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोग खुद को ट्राई, सीबीआई और साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी बता रहे हैं। वे आरोप लगा रहे थे कि उनके बैंक खाते से अवैध लेनदेन हो रहा है।’
सिंघल ने बताया, ‘शिकायत मिलने के बाद हमारी टीम हरकत में आई और गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा और महाराष्ट्र में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें चार ताइवान के नागरिक भी शामिल हैं। हमें लगता है कि इस गिरोह ने अब तक लगभग 1,000 लोगों को अपना शिकार बनाया होगा।’
गिरफ्तार किए गए ताइवान के नागरिकों की पहचान मू ची सुंग (42), चांग हू युन (33), वांग चुन वेई (26) और शेन वेई (35) के रूप में हुई है। बाकी 13 आरोपी गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और राजस्थान के रहने वाले हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि ताइवान के ये चारों नागरिक पिछले एक साल से भारत आ-जा रहे थे। इन्होंने ही गिरोह के बाकी सदस्यों को पैसों के लेन-देन के लिए मोबाइल ऐप और दूसरी तकनीकी मदद मुहैया कराई थी।
सिंघल ने बताया, ‘जिन मोबाइल ऐप का इस्तेमाल यह गिरोह कर रहा था, उन्हें ताइवान के इन चारों ने ही बनाया था। इन्होंने अपनी इस सिस्टम में ऑनलाइन वॉलेट भी जोड़ रखे थे। पीड़ितों से मिले पैसों को इसी ऐप के जरिए दूसरे बैंक खातों और दुबई के क्रिप्टो खातों में भेजा जाता था। इन्हें हर ट्रांजेक्शन पर कमीशन मिलता था, जो हवाला के जरिए दिया जाता था।’
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह अलग-अलग कॉल सेंटरों से अपना काम करता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12.75 लाख रुपये नकद, 761 सिम कार्ड, 120 मोबाइल फोन, 96 चेक बुक, 92 डेबिट और क्रेडिट कार्ड और 42 बैंक पासबुक बरामद की हैं।




