यमुना पार में फिर खूनी संघर्ष तेज होने के आसार, पुलिस को अलर्ट रहने के निर्देश

कुख्यात गैंगस्टर हाशिम बाबा के गुर्गे मिस्बाह की हत्या के बाद बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। बीते हफ्ते सीलमपुर में कुख्यात गैंगस्टर हाशिम बाबा के गुर्गे मिस्बाह की हत्या के बाद यमुनापार में एक बार फिर खूनी संघर्ष तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वारदात के 24 घंटे के अंदर स्पेशल सेल व सीलमपुर थाना पुलिस ने कुख्यात गैंग्सटर इरफान उर्फ छेनू गिरोह के दो गुर्गे प्रिंस गाजी और अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया लेकिन इससे मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। इंटेलीजेंस को रिपोर्ट मिली है कि मिस्बाह की हत्या के बाद यमुनापार के गैंग्स्टरों में फिर से गैंगवार शुरू हो सकता है। इसे देखते हुए जिला पुलिस के अलावा स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच को मुख्यालय से अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मिस्बाह की हत्या के कुछ देर बाद ही पुलिस को पता लग गया था कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बदमाश छेनू के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया गया है। लेकिन दो दिन पहले पहली बार छेनू ने इंटरनेट मीडिया पर एक आडियो क्लीप डालकर हत्या की जिम्मेदारी ले ली।
पिछले तीन दशक से दोनों गिरोहों के बीच खूनी संघर्ष में दर्जनों बदमाशों की हत्या हो चुकी है लेकिन कभी किसी ने वारदात की जिम्मेदारी नहीं ली थी। पहली बार छेनू के जिम्मेदारी लेने से गैंगवार की संभावना अधिक हो गई है। विदेश में बैठे गैंग्स्टरों द्वारा वारदात कराने केे बाद जिम्मेदारी लेने के पैटर्न पर छेनू ने रविवार को पहली बार फेसबुक पर एक बयान जारी किया। गिरोह ने खुद को ”छेनू-रिजवान ग्रुप बताया। इरफान के जेल में होने के कारण विकलांग दसका चचेरा भाई रिजवान पर्दे के पीछे से गिरोह चला रहा है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि पोस्ट में इस्तेमाल आडियो से पता चलता है कि यह इरफान के गुरुग्राम के सहयोगी कौशल चौधरी गिरोह के सहयोगियों द्वारा पोस्ट कराया गया।
पोस्ट में मिस्बाह के बारे में कहा गया कि उसे बार-बार चेतावनी दी गई फिर भी उसने प्रतिद्वंद्वी हाशिम बाबा गिरोह की ओर रुख किया। उसे पहले कालर पकड़कर घसीटा गया उसके बाद 15 गोलियां मारी गई। पोस्ट में उन लोगों को भी धमकी दी गई है जो उसके नक्शे कदम पर चल रहा है। हाशिम जेल में है। उसके गिरोह के अधिकांश सदस्यों और यहां तक कि उसकी पत्नी के भी जेल में होने के कारण उसका वजूद खतरे में है।
हाशिम का सीलमपुर, जाफराबाद, मौजपुर और वेलकम आदि इलाकों में युवा उसके गिरोह में शामिल होने के लिए लड़ते थे। इसी कारण लारेंस बिश्नोई ने कुछ साल पहले उसके साथ हाथ मिलाया था। बिश्नोई से हाथ मिलाने के कारण हाशिम के गढ़ के लोग उसके खिलाफ हो गए। जिससे हाशिम को स्थानीय शूटर्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। उसके वफादार सहयोगी भी उसके साथ काम करने में हिचकिचा रहे हैं। हाशिम अपने ग्रुप के गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई, राशिद केबल वाला, दविंदर सिंह बंबीहा, हिमांशु भाऊ, नीरज बवाना, नवीन बाली, लक्की पटियाल और कौशल चौधरी जैसे साथियों से मदद ले सकता है।

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