9 माह से अटकी प्रोत्साहन राशि और 6 माह का सुपोषण भुगतान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मनेंद्रगढ़ परियोजना अधिकारी को सौंपा आवेदन

मनेंद्रगढ़ परियोजना के महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने नौ माह से लंबित प्रोत्साहन राशि और छह माह से अटकी सुपोषण चौपाल भुगतान को लेकर परियोजना अधिकारी को आवेदन सौंपा है। कार्यकर्ताओं ने बताया कि जून 2024 से फरवरी 2025 तक की इंसेंटिव राशि अब तक नहीं मिली है, जबकि वे नियमित रूप से शासन के सभी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो शासन की जमीनी योजनाओं पर असर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीमित मानदेय से परिवार चलाना पहले ही मुश्किल है, ऐसे में महीनों से भुगतान न होने से काम प्रभावित होना स्वाभाविक है। यह मामला अब जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
शोभित शर्मा,मनेंद्रगढ़/छत्तीसगढ़। मनेंद्रगढ़ परियोजना के महिला एवं बाल विकास विभाग में पोषण ट्रैकर ऐप से जुड़े आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने नौ माह से लंबित प्रोत्साहन राशि और छह माह से अटकी सुपोषण चौपाल भुगतान को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने 26 मई 2025 को परियोजना अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपते हुए कहा कि जून 2024 से फरवरी 2025 तक की इंसेंटिव राशि अब तक नहीं मिली है, जबकि वे शासन के सभी कार्य नियमित रूप से कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि सुपोषण चौपाल की छह माह की राशि भी अटकी हुई है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उनका कहना है कि सीमित मानदेय से परिवार चलाना पहले ही मुश्किल है, ऐसे में महीनों से भुगतान न होने से काम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो शासन की जमीनी योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा।
पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुपोषण से जुड़े डेटा का संकलन होता है, जो विभाग की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। ऐसे में फील्ड स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं की अनदेखी कई सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे हैं और डेटा अपडेट कर रहे हैं, तो नौ माह तक भुगतान रोकने के पीछे जिम्मेदार कौन है? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है, बजट की कमी है या विभागीय उदासीनता?
इस मामले ने अब जांच और जवाबदेही की मांग तेज कर दी है। आवेदन के बाद कार्यकर्ताओं की नजर इस बात पर है कि विभाग उनकी जायज मांग पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है, क्योंकि यह मामला सीधे पोषण अभियान और सरकारी मॉनिटरिंग व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।




