विधायक लाइन में खड़े रहे, अफसरों की पत्नियों को मिला वीआईपी प्रोटोकॉल

महाकुंभ को लेकर भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर का बड़ा आरोप

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ को कमजोर करने की साजिश का संकेत देने के एक दिन बाद, गाजियाबाद के लोनी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने 29 जनवरी की भगदड़ की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। इस भगदड़ में 30 लोगों की जान चली गई थी जबकि अन्य 60 घायल हो गए थे। गुर्जर ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य में अधिकारी समाजवादी पार्टी के प्रभाव में काम कर रहे हैं।
उन्होंने महाकुंभ भगदड़ की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपने परिवारों के लिए वीआईपी सुविधा को प्राथमिकता देते हैं जबकि सामान्य तीर्थयात्रियों को महाकुंभ में संघर्ष करना पड़ा। गुर्जर ने दावा किया, ”विधायक, जो अधिकारियों से ऊंचे पद पर हैं, उन्हें कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर किया गया, जबकि नौकरशाहों की पत्नियों को ‘वीआईपी प्रोटोकॉल’ प्राप्त हुआ।”
गुर्जर के बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रसारित हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह (तीर्थयात्रियों की) मौतें नहीं बल्कि हत्याएं थीं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मैं मुख्यमंत्री से महाकुंभ के बजट को लूटने के लिए मुख्य सचिव और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आग्रह करता हूं। वह (महाकुंभ में) तीर्थयात्रियों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें एनएसए के तहत जेल में डाला जाना चाहिए।’’
इस घटना के बाद राज्य सरकार ने पहले ही इसकी जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश हर्ष कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है और इसमें पूर्व पुलिस महानिदेशक वीके गुप्ता और सेवानिवृत्त आईएएस डीके सिंह भी शामिल हैं। आयोग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों के लिए 25-25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की भी घोषणा की है।

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