छत्तीसगढ़ में अब जांच कर सकेगी सीबीआई, 5 साल पहले लगी रोक हटी

रायपुर/एजेंसी। छत्तीसगढ़ में अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई जांच करेगी। सीबीआई पर करीब 5 साल पहले लगी रोक अब विष्णुदेव सरकार ने वापस ले ली है। अब सीबीआई पहले की तरह राज्य में भी जांच कर पाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार के गृह विभाग ने राज्य में सीबीआई की तरफ से की जाने वाली जांच और रिसर्च के लिए अधिकारिता के संबंध में पूर्व सीएम भूपेश बघेल की सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को 10 जनवरी 2019 को भेजे गए विभागीय पत्र को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।
दरअसल, साल 2018 में कांग्रेस पार्टी की सरकार सत्ता में आने पर मौजूदा सीएम भूपेश बघेल की सरकार ने राज्य में सीबीआई की इंट्री पर रोक लगा दिया था। सीबीआई को मिली सहमति को भूपेश सरकार ने रद्द कर दिया था। जिसके चलते भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े गए आरोपी की जांच के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगनी पड़ी थी जिसकी परमिशन राज्य सरकार ने नहीं दी थी। अब बीजेपी की सरकार बनने पर सहमति मिल गई है।
छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को एक मामले की जांच की अनुमति दे दी है। यह भ्रष्‍टाचार से जुड़ा मामला है। वहीं, इस मामले की जांच सीबीआई दिल्‍ली विशेष पुलिस स्‍थापना यानी डीएसपीआई अधिनियम के तहत की जाएगी। इस संबंध में गृह विभाग ने नोटिफिकेश जारी कर दिया है। जिस मामले में सीबीआई जांच करने वाली है, वह मामला रिश्‍वतखोरी से जुड़ा है। बीते महीने 29 जनवरी 2024 को सीबीआई ने भिलाई में एक बीएसपी कर्मी शम्‍सुज्‍जमा खान को रिश्‍वत लेते पकड़ा था। इसी मामले की जांच के लिए सीबीआई ने गृह विभाग से अनुमति मांगी थी।
पीएससी मामले में जांच का रास्ता साफ
छत्तीसगढ़ राज्य के मामलों की सीबीआई को जांच के लिए सहमति दिए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में अनियमितता व भ्रष्टाचार मामले की सीबीआई जांच का रास्ता साफ हो गया है। गृह विभाग ने राज्य शासन के निर्णय और ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद प्रकरण जांच के लिए सीबीआई को आज-कल में भेजने की तैयारी है।
पीएससी के अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज हुए मामले
ईओडब्ल्यू में पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी व तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव समेत कई अन्य अधिकारियों व राजनेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र का अपराध दर्ज किया गया है। राज्य सेवा परीक्षा-2021 के अंतर्गत 12 विभागों के 170 पदों पर भर्ती के लिए चयन सूची जारी की गई थी, जिसको लेकर अनियमितता की शिकायतें मिली थीं।
कभी भी सीबीआई शुरू कर सकती है जांच
बीजेपी की सीएम विष्णुदेव साय की सरकार ने सत्ता संभालते ही गत 3 जनवरी 2024 के कैबिनेट की बैठक में पीएससी 2021-22 में हुए गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी। इसे लेकर करीब महीनेभर बाद राज्य शासन ने ईओडब्ल्यू / एसीबी में एफआईआर भी दर्ज कराई। चूंकि अब सीबीआई पर राज्य में लगा प्रतिबंध हट गया है, लिहाजा सीबीआई कभी भी छत्तीसगढ़ में धमक सकती है। इसे देखते हुए सबसे पहले राज्य शासन ने पीएससी परीक्षा नियंत्रक को ही हटाकर यह संकेत देने की कोशिश की है, किसी भी तरह से जांच को प्रभावित नहीं किया जाए।
मालूम हो कि पीएससी 2021-22 की परीक्षा में तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर कई गंभीर आरोप लगे, इन परीक्षाओं में करीब 18 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनके सीधे संबंध राज्य के अफसरों, कांग्रेस नेताओं और पूर्व पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से हैं। करीब दो अभ्यर्थियों को पूर्व अध्यक्ष श्री सोनवानी का रिश्तेदार बताया गया है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने याचिका लगाई थी, जिनकी याचिका पर दो बार सुनवाई भी हुई और करीब 16 चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग रोक दी गई है।

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