संतों ने मां सरयू को 151 मीटर की लंबी चुनरी अर्पित की, निद्रा से नारायण जागे तो शुरू हुए अनुष्ठान
Saints offered 151 meter long chunari to mother Saryu, when Narayan woke up from sleep, rituals started

अयोध्या/उत्तर प्रदेश। कार्तिक पूर्णिमा के महत्व और कल्याणकारी प्रभाव के चलते राम की नगरी अयोध्या में अनेक धार्मिक अनुष्ठान के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संतों का कहना है कि इसी महीने अक्षय नवमी के दिन भगवान विष्णु लंबे विश्राम के बाद जगते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए ऐसे आयोजन किए जाते हैं, जिससे समाज के साथ लोगों का भी कल्याण हो। 14 कोसी परिक्रमा, 5 कोसी परिक्रमा और सरयू स्नान के साथ ही सभी मांगलिक काम कार्तिक मास में शुरू हो जाते हैं।इस क्रम में बुधवार को मां सरयू को 151 मी लंबी चुनरी चढ़ाकर उन्हें प्रसन्न करने के लिए दुग्धाभिषेक और अनुष्ठान किए गए। संत समाज ने 151 मी लंबी चुनरी के साथ शोभायात्रा निकाली, जो अयोध्या के प्रमुख चौराहों से होकर सरयू तट पर पहुंची।
शोभायात्रा गाजे बाजे के साथ रामाधुन करती हुई निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में प्रमुख मंदिरों के संत महंत शामिल हुए। भक्तमाल मंदिर के महंत कौशल किशोर दास के निर्देशन व महंत अवधेश दास के संयोजन मे निकली यात्रा का लोगों ने जगह-जगह स्वागत भी किया।
महंत अवधेश दास ने कहा कि भगवान नारायण के जागृत होने के कारण कार्तिक मास सबसे शुभ व कल्याणकारी माना जाता है। इसी की एकादशी को माता तुलसी का शालिग्राम भगवान से विवाह का कार्यक्रम आयोजित करने के साथ समाज मे शुभ विवाह के कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि संतों ने 151 मी लंबी चुनरी मां सरयू को अर्पित की है। साथ ही उनसे अयोध्या के साथ देश-विश्व कल्याण का आशीर्वाद मांगा है।


