मणिपुर ‘घटना के दोषियों पर हो कार्रवाई, पीड़ितों को मिले सहायता’ मेघालय महिला आयोग ने की सरकार से मांग

शिलांग,,(एजेंसी)। मेघालय राज्य महिला आयोग ने शनिवार को केंद्र और मणिपुर सरकार से जातीय संघर्षग्रस्त राज्य में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। आयोग ने मणिपुर में संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की भी अपील की कि वहां जातीय संघर्ष के सभी पीड़ितों को आवश्यक सहायता और पुनर्वास दिया जाए।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे केंद्र और मणिपुर सरकार
आयोग ने एक बयान में कहा, “हम केंद्र और मणिपुर सरकार से मानवीय क्रूरता के भयानक कृत्य में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं, जिससे देश की हर महिला और बच्चे की गरिमा और सुरक्षा को खतरा है।”
महिला की गरिमा पर हमला स्वीकार्य नहीं
मेघालय महिला आयोग ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी महिला की गरिमा पर कोई भी हमला स्वीकार्य नहीं है। आयोग ने कहा कि हम मानवाधिकारों, खासकर अल्पसंख्यकों और कमजोर लोगों के अधिकारों के इस घोर उल्लंघन को देखकर दुखी हैं।
मणिपुर वायरल वीडियो से देशभर में आक्रोश
गौरतलब है कि इस घटना से देशभर में आक्रोश फैल गया है। मणिपुर पुलिस ने 19 जुलाई को सामने आए उस वीडियो के सिलसिले में पांचवें आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसमें भीड़ द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाते हुए दिखाया गया है। महिला संगठन ने घटना का संज्ञान लेने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त किया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए गुरुवार को कहा कि हिंसा को अंजाम देने के लिए महिलाओं को साधन के रूप में इस्तेमाल करना संवैधानिक लोकतंत्र में बिल्कुल अस्वीकार्य है। वीडियो पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और मणिपुर सरकार को तत्काल उपचारात्मक, पुनर्वास और निवारक कदम उठाने और की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया।
मणिपुर में तीन मई से शुरू हुई हिंसा
मणिपुर में तीन मई से इम्फाल घाटी में केंद्रित बहुसंख्यक मैती समुदाय और पहाड़ियों पर कब्जा करने वाले आदिवासी कुकी के बीच जातीय झड़पें हो रही हैं। मई की शुरुआत में राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 160 से अधिक लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हुए हैं। यह हिंसा तब शुरू हुई, जब मैती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की स्थिति की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया था।

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