आजमगढ़-मऊ बॉर्डर पर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में मारा गया कुख्यात अपराधी शंकर कन्नौजिया

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। आजमगढ़-मऊ बॉर्डर पर शनिवार सुबह पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में कुख्यात अपराधी शंकर कन्नौजिया मारा गया। हत्या और अपहरण जैसे संगीन मामलों में वांटेड शंकर पिछले 14 सालों से फरार था। उसकी अपराध की कुंडली बेहद खौफनाक रही। 2011 में उसने गाड़ी बुक कराकर ड्राइवर की गला काटकर हत्या की थी, जबकि जुलाई 2024 में पिकअप ड्राइवर का सिर धड़ से अलग कर हत्या की। ऐसे कई जघन्य अपराधों के कारण वाराणसी जोन के एडीजी ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
शनिवार तड़के करीब 4:30 बजे एसटीएफ को सूचना मिली कि आजमगढ़-मऊ बॉर्डर से होकर एक बड़ा अपराधी गुजरने वाला है। इसके बाद एसटीएफ और पुलिस की एसओजी टीम ने इलाके में चेकिंग शुरू की। चेकिंग के दौरान एक बाइक पर दो संदिग्ध दिखाई दिए। टीम ने रुकने का इशारा किया तो बाइक सवार बदमाशों ने कार्बाइन से फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोलियां चलाईं। इसमें एक बदमाश घायल होकर गिर पड़ा जबकि दूसरा मौके से फरार हो गया। घायल अपराधी को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी पहचान शंकर कन्नौजिया पुत्र लालचंद निवासी हाजीपुर, थाना रौनापार, आजमगढ़ के रूप में हुई।
मुठभेड़ स्थल से 9 एमएम की कार्बाइन, पिस्टल, खुखरी और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने शंकर के भाई को बुलाकर शव की शिनाख्त कराई और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। शंकर का अपराध जगत से नाता साल 2011 से शुरू हुआ। उस वर्ष उसने मऊ जिले के दोहरीघाट इलाके में गाड़ी बुक कराने के बहाने विंध्याचल पांडे नामक युवक की गला काटकर हत्या कर दी। इस वारदात के बाद से पुलिस उसकी तलाश में रही लेकिन वह हर बार गिरफ्त से बच निकला।
जुलाई 2024 में उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर आजमगढ़ के महाराजगंज क्षेत्र से पिकअप ड्राइवर शैलेंद्र सिंह का अपहरण किया और सिर धड़ से अलग कर हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया लेकिन शंकर फरार हो गया। इसके बाद उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ। फरारी के दौरान शंकर का नाम कई गंभीर वारदातों में सामने आया। आजमगढ़ और मऊ में उसके खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, धमकी और आर्म्स एक्ट के 9 मुकदमे दर्ज थे। इनमें से तीन मुकदमे आजमगढ़ के रौनापार और जीयनपुर थाने में और छह मुकदमे मऊ के दोहरीघाट थाने में दर्ज थे।
उसकी पहचान बेहद क्रूर अपराधी के रूप में थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह हत्या के बाद लाश का सिर काटकर अलग कर देता था ताकि पहचान न हो सके। यही वजह रही कि वह इलाके में खौफ का दूसरा नाम बन गया था। शंकर की शादी नहीं हुई थी। उसके मां-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। घर में उसका भाई, भाभी और उनके बच्चे रहते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि वह शुरू से ही हिंसक स्वभाव का था और अपराध की दुनिया में जल्दी ही उतर गया।

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