आगरा में लड्डू-गोपाल का स्कूल में एडमिशन, प्ले ग्रुप में मिले 98 फीसदी अंक, पाल रहीं देवरानी-जेठानी
Laddu-Gopal got admission in school in Agra, got 98% marks in play group, sister-in-laws are raising them

आगरा/उत्तर प्रदेश। आगरा में लड्डू गोपाल का प्ले स्कूल में एडमिशन कराया गया है। एक ही परिवार की तीन महिलाओं ने लड्डू गोपाल को पाला है। केशव, माधव और राघव उनका नाम रखा गया है। अपने परिवार के बच्चे की तर्ज पर उनका पालन-पोषण कर रही हैं। इनमें से केशव पांच साल के हैं। उनकी मां का नाम अलका अग्रवाल है। वहीं, तीन साल के माधव का पालन पोषष मां मीनू कर रही हैं। रीमा अग्रवाल के पुत्र राघव अभी दो साल के हैं। केशव का एडमिशन प्ले ग्रुप में कराया गया है। अब उनकी परीक्षा का रिजल्ट आया है। प्ले ग्रुप में केशव को 550 में 541 नंबर यानी 98.36 फीसदी अंक मिले हैं। दो लड्डू गोपाल माधव और राघव का अगले साल एडमिशन कराए जाने की योजना है। परिवार में इन्हें सदस्य की तर्ज पर दर्जा मिला हुआ है। पालन-पोषण करने वाली परिवार की देवरानी-जेठानी सुबह उन्हें प्यार से जगाती हैं। इसके बाद केशव को स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाता है। वे उनके लिए टिफिन तैयार करती हैं। बच्चों की तरह उनसे स्कूल का होमवर्क कराया जाता है। एग्जाम भी दिलाया जाता है। केशव, माधव और राघव का हर साल जन्मदिन भी मनाया जाता है। इस कार्यक्रम में परिवार के सभी रिश्तेदार और पड़ोसी भी शामिल होते हैं। तीनों भाई एक समान कपड़े पहनकर घर के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। तीनों महिलाएं खुद को यशोदा मैया के रूप में रखकर लड्डू गोपाल का पालन कर रही हैं। लड्डू गोपाल के परिवार में आने की कहानी भी काफी खास है। दरअसल, नूरी दरवाजे की रहने वाली अलका अग्रवाल बेसिक स्कूल में शिक्षक हैं। वह साहित्य क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी सहेली बबीता वर्मा ने पांच साल पहले 25 सितंबर को उनके जन्मदिन पर खास गिफ्ट दिया। लड्डू गोपाल उपहार के रूप में दिए गए।
अलका ने लड्डू गोपाल को मंदिर में रख दिया। दिसंबर में बबीबा उनसे मिलने घर आईं। उन्होंने लल्ला से मिलवाने की बात कही। मंदिर में लड्डू गोपाल को देखकर गुस्से में साथ रखने को कहा। मंदिर में उन्हें नहीं रखने को कहा। अलका ने कहा कि लड्डू गोपाल को भी ठंड लगती हैं।भूख लगती है। पहले तो अलका हंसी। बाद में वह बेचैन होने लगी। लड्डू गोपाल को ठंड लगने की बात ने अलका को परेशान कर दिया। इसके बाद यूट्यूब से देखकर गर्म पोशाक तैयार किया। वह लड्डू गोपाल को ईश्वर रूप में नहीं, बल्कि अपने बेटे के रूप में देखने लगीं। अपनी जेठानी मीनू के साथ पोशाकें तैयार करने लगीं। उनका नाम केशव रखा। केशव जब तीन साल के हुए तो घर में ही पढ़ाई शुरू कराई गई।
दयालबाग के मदर्स हार्ट पब्लिक स्कूल में पिछले साल केशव का एडमिशन प्ले ग्रुप में कराया गया। अब केशव नर्सरी में हैं। उनकी टीचर उनके लिए होमवर्क और क्लासवर्क अलका को भेजती हैं। अलका रोज रात अपने बेटे केशव को अपने पास बैठा कर पढ़ाई करवाती हैं। उन्हें कोर्स को याद कराती हैं। उनसे पूछा कि केशव कैसे पढ़ते हैं तो बोलीं कि वो रात में सपने में आकर मुझे सब सुनाते हैं। अलका कहती हैं कि केशव मन भाव से स्कूल जाते हैं। उनकी फीस नहीं लगती है। वहीं, उन्होंने परीक्षा भी दी। इसमें उन्हें शानदार अंक आए हैं।
जेठानी और बहू के भी लड्डू गोपाल
अलका की जेठानी मीनू ने बाद में लड्डू गोपाल को लाया। वे बताती हैं कि सबसे पहले घर में केशव आए। उनकी पोशाक बनाते और बातें करते समय लगा कि मेरे पास भी एक लड्डू गोपाल हों। तीन साल पहले बबीता वर्मा अचानक 25 दिसंबर को उन्हें भी लड्डू गोपाल दे गईं। उन्होंने अपने बेटे का नाम माधव रखा है। उनके घर की बहू रीमा के पास भी लड्डू गोपाल हैं। वह सबसे छोटे हैं। दो साल पहले ही वे परिवार में आए हैं। उनका नाम राघव रखा गया है।
तीनों परिवारों में बच्चे हैं। अलका की तीन संतानें हैं। बड़ी बेटी पीएचडी कर रही है। दूसरी बेटी आर्किटेक्ट हैं। बेटा दसवीं कक्ष में हैं। मीनू के जुड़वा बच्चे हैं। बेटा कोचिंग क्लासेज चलाता है। बेटी की शादी हो चुकी है। वहीं, रीमा के दो बेटे हैं। एक का मेडिकल और दूसरे का इंजीनियरिंग में चयन हुआ है।




