मजहब का नहीं कोई पर्दा, एक ही छत के नीचे हुई हिंदू- मुस्लिम बेटियों की शादी

वडोदरा,(गुजरात)। वडोदरा की दो लड़कियों शिवानी माली और खुशबू शेख की जिंदगी में मंगलवार का दिन यादगार पल ले आया। जिनकी शादी एक ही सामूहिक विवाह स्थल पर हुई थी। जहां शिवानी की शादी रोहित माली के साथ शादी की। तो वहीं खुशबू ने वड़ोदरा के रहने वाले मंसूरी मुनाफ से शादी की। यहां आणंद जिले के उमेटा गांव में एक एनजीओ जरयाह फाउंडेशन के जरिए अनोखे सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। दरअसल फाउंडेशन बिना किसी मजहबी लाग लपेट को माने ऐसी शादी का आयोजन करता चला आ रहा है। एनजीओ के जरिए आयोजित किया जाने वाला इस तरह का तीसरा आयोजन था। जहां इस बार कुल 67 ऐसे जोड़ों ने एक दूसरे का हाथ थामा। इनमें 57 मुस्लिम और 10 हिंदू जोड़े शामिल थे। जिनकी पूरे रस्मो-रिवाज और पारंपरिक संस्कारों के साथ शादी हुई।

एनजीओ की ओर से बताया गया कि ‘हमने 2019 में पहला सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसमें 13 मुस्लिम जोड़ों ने ‘निकाह’ के माध्यम से शादी की थी। साल 2020 में हमने 32 जोड़ों के लिए ‘निकाह’ समारोह आयोजित किया था। लेकिन इस साल हमने मुसलमानों और हिंदुओं सहित 67 जोड़ों के विवाह का समर्थन करने का फैसला किया। ताकि सभी योग्य बेटियां और उनके माता-पिता धर्म या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की किसी भी बाधा के बावजूद इस अवसर का जश्न मना सकें। सामूहिक विवाह समारोह के लिए उन लड़कियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। जिनकी उम्र विवाह योग्य हो गई थी, लेकिन वे आर्थिक तंगी का सामना कर रही थीं।वोहरा ने समझाया, ‘परिवारों की वित्तीय स्थिति के आधार पर आवेदनों की जांच की गई। उदाहरण के तौर पर हमारी पहली प्राथमिकता उन बेटियों का समर्थन करना था। जो या तो अनाथ थीं या फिर जिन्हें माता-पिता का सहारा नहीं था। हमारी दूसरी प्राथमिकता उन बेटियों के लिए थी जिन्होंने परिवार में एकमात्र कमाने वाले को खो दिया था। फाउंडेशन ने न केवल होने वाली दुल्हन के लिए आमंत्रित किया। बल्कि उन्हें 15 सेट कपड़े और नए घरों के लिए बुनियादी फर्नीचर और रसोई के बर्तन भी उपहार में दिए।

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